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मालदीव को लेकर भारत और चीन आमने-सामने, छिड़ी वर्चस्‍व की जंग!

Posted On: 8 Feb, 2018 Politics में

Avanish Kumar Upadhyay

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पिछले साल डोकलाम विवाद के बाद अब मालदीव मुद्दे को लेकर एक बार फिर चीन और भारत आमने-सामने हैं। हिंद महासागर के करीब बसा द्वीपीय देश मालदीव इन दिनों सत्ता संघर्ष के दौर से गुजर रहा है। मालदीव के सुप्रीम कोर्ट की ओर से राजनीतिक कैदियों और विपक्षी नेताओं को जेल से रिहा करने के दिए गए आदेश के बाद सोमवार (5 फरवरी) को राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन ने मालदीव में आपातकाल घोषित कर दिया। इसके बाद सुरक्षा बलों ने अदालत पर कब्जा जमा लिया और चीफ जस्टिस समेत दो सीनियर जजों को गिरफ्तार कर लिया गया। इसके अलावा पूर्व राष्ट्रपति गयूम को भी अरेस्ट कर लिया गया। मालदीव मुद्दे को लेकर भारत और चीन के बीच शक्ति संतुलन को लेकर भी जद्दोजहद देखने को मिल रही है। आइये आपको बताते हैं क्‍या है पूरा मामला।


PM midi jinping


भारत और चीन आमने-सामने

मालदीव में आपातकाल की घोषणा के बाद बुधवार को सरकार के दबाव में बाकी जजों ने पिछले आदेश को वापस लेने का फैसला सुनाया। यह सब घटनाक्रम यूं तो मालदीव में हो रहा था, लेकिन इससे भारत में भी चिंता देखी गई। मालदीव की शीर्ष अदालत के आदेश को लेकर भारत ने कहा था कि सरकार को अदालत के आदेश को मानना चाहिए। इस बीच पिछले साल ही मालदीव के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट साइन करने वाले चीन ने कहा कि वहां के 4,00,000 लोगों में पूरे विवाद से निपटने की क्षमता है और किसी को उसमें दखल नहीं देना चाहिए।


दोनों देशों के वर्चस्‍व का मामला

एशिया में चीन को अपना प्रमुख भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी मानने वाला भारत पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अमेरिका और जापान के सहयोग से क्षेत्रीय स्तर पर अपना वर्चस्व साबित करना चाहता है। हालांकि, इस बीच चीन ने भी दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया में अपने वर्चस्व को बढ़ाने के प्रयास किए हैं। श्रीलंका और पाकिस्तान में बंदरगाह बनाने से लेकर अफ्रीकी देश जिबूती में मिलिट्री बेस बनाने जैसे कदम उठाए हैं।


भारत के लिए मालदीव बेहद महत्‍वपूर्ण

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जानकारों का मानना है कि हिंद महासागर क्षेत्र में भारत अपनी स्थिति मजबूती से दर्ज कराना चाहता है। ऐसे में मालदीव उसके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसकी वजह यह है कि मालदीव के मौजूदा राष्ट्रपति यामीन ने चीन से अपनी नजदीकी बढ़ाई है। पश्चिम के दबाव को कम करने और भारत पर अपनी निर्भरता को खत्म करने के लिए उन्होंने ऐसा कदम उठाया है। बीते कुछ सालों से मालदीव राजनीतिक तौर पर अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है। 2013 के चुनावों में सत्ता में आने वाले यामीन ने चीन और सऊदी इन्वेस्टमेंट को बड़े पैमाने पर आमंत्रित किया है।


Maldives cricis


भारत से दखल की मांग

मालदीव के राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन राजनीतिक विरोधियों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को जेल में डालने को लेकर आलोचनाओं का शिकार हुए हैं। यामीन की ओर से कोर्ट के आदेश को खारिज कराने से पहले निर्वासित पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद ने भारत से दखल देने की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि भारत को अपने सैनिकों को भेजकर हालात संभालने का प्रयास करना चाहिए। अमेरिका ने भी मालदीव में आपातकाल लगाए जाने की आलोचना की है।


भारत का मालदीव से पुराना रिश्ता

मालदीव के साथ भारत के सदियों पुराने सांस्कृतिक संबंध हैं। मालदीव के साथ नई दिल्ली का धार्मिक, भाषाई, सांस्कृतिक और व्यावसायिक संबंध है। 1965 में आजादी के बाद मालदीव को सबसे पहले मान्यता देने वाले देशों में भारत शामिल था। भारत ने 1972 में मालदीव में अपना दूतावास भी खोला। मालदीव में करीब 25 हजार भारतीय रह रहे हैं। हर साल मालदीव जाने वाले विदेशी पर्यटकों में 6 फीसदी भारतीय होते हैं। मालदीव के लोगों के लिए शिक्षा, चिकित्सा और व्यापार के लिहाज से भारत एक पसंदीदा देश है। विदेश मंत्रालय के अनुसार मालदीव के नागरिकों द्वारा उच्च शिक्षा और इलाज के लिए लॉन्ग टर्म वीजा की मांग बढ़ती जा रही है…Next


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