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पीएम मोदी ऐसा करने वाले दुनिया के अकेले नेता, अमेरिका से हुई तारीफ

Posted On: 20 Nov, 2017 Politics में

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देश ही नहीं, दुनियाभर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जबरदस्‍त लोकप्रियता है। हाल ही में एक अमेरिकी शीर्ष विशेषज्ञ माइकल पिल्सबरी ने कहा है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही अकेले ऐसे नेता हैं, जिन्होंने चीन के ‘बेल्‍ट एंड रोड’ प्रोजेक्ट का विरोध किया है। यहां तक कि अमेरिका भी इस मामले में चुप था। अमेरिका के जाने-माने थिंक-टैंक हडसन इंस्टीट्यूट के सेंटर ऑन चाइनीज स्ट्रैटजी के निदेशक माइकल पिल्सबरी ने अमेरिकी सांसदों के समक्ष कहा कि मोदी और उनकी टीम ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की इस महत्वाकांक्षी परियोजना का मुखर तरीके से विरोध किया है।


modi1


अमेरिकी सरकार रही खामोश


modi jinping


पिल्सबरी ने कहा कि विश्व में अभी तक कोई वैश्विक नेता इसके खिलाफ खड़ा हुआ है, तो वह हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। कुछ हद तक ऐसा इसलिए भी है, क्योंकि चीन की यह परियोजना चीन-भारतीय संप्रभुता के दायरे का भी उल्लंघन करती है। उन्होंने इस मामले पर अभी तक अमेरिकी सरकार की चुप्पी पर भी निशाना साधा। पिल्सबरी ने कहा कि बेल्ट एंड रोड परियोजना की शुरुआत को 5 साल हो चुके हैं। शुरुआती समय को छोड़ दिया जाए, तो अमेरिकी सरकार इस पर लगभग खामोश ही रही है।


ट्रंप प्रशासन की तारीफ


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इंडो-पैसिफिक रणनीति के लिए डोनाल्‍ड ट्रंप प्रशासन की तारीफ करते हुए पेंटागन के इस पूर्व अधिकारी कहा कि हालिया दिनों में लोगों ने यह सुना कि ट्रंप प्रशासन और खुद राष्ट्रपति ट्रंप ने 50 से अधिक बार ‘स्वतंत्र और खुले’ इंडो-पैसिफिक इलाके के बारे में बात की। चीन इसे लेकर लगातार हमलावर है और उसे यह बिल्कुल पसंद नहीं।


क्या है बेल्ट एंड रोड परियोजना


jinping


प्राचीन सिल्क रोड को फिर से अस्तित्व में लाने की परियोजना के तहत चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने बेल्ट एंड रोड (BRI) की शुरुआत की है। इसके जरिये चीन की योजना दक्षिण एशियाई देशों के अलावा यूरोप को जोड़ने की है। बेल्ट एंड रोड का अहम हिस्सा चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपैक) में है। 3,000 किलोमीटर लंबी यह परियोजना चीन के शिनजियांग को पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह से जोड़ेगी। यह जम्मू-कश्मीर के गिलगित-बाल्टिस्तान से होकर गुजरेगी, जिसे भारत अपना हिस्सा मानता है और इस पर फिलहाल पाकिस्तान का कब्जा है। इस इलाके में चीन की मौजूदगी को भारत अपनी संप्रभुता में दखल के तौर पर देख रहा है। यही वजह है कि भारत इस परियोजना से दूरी बना रहा है…Next


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