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मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों को लेकर बाप-बेटे में 'जंग'

Posted On: 28 Sep, 2017 Politics में

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राजनीति जो न करा दे। इसका ताजा उदाहरण बना है अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में वित्त मंत्री रहे यशवंत सिन्‍हा और उनके बेटे व केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्‍हा के बीच अर्थव्‍यवस्‍था को लेकर छिड़ी ‘जंग’। यशवंत सिन्‍हा द्वारा भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति पर उठाए गए सवालों के बाद उनके बेटे जयंत सिन्हा ने ही उन्‍हें जवाब दिया है। नागर विमानन राज्यमंत्री जयंत ने मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों का बचाव करते हुए कहा है कि हम एक नई मजबूत अर्थव्यवस्था बना रहे हैं, जो लंबे समय में न्यू इंडिया के लिए फायदेमंद होगी। उन्‍होंने कहा है कि एक या दो तिमाही के आंकड़ों को न देखते हुए इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि हम अभी संरचनात्मक सुधार कर रहे हैं, जो लंबे समय के लिए हमारे लिए फायदेमंद होगा।


yashwant and jayant


ज्‍यादा पारदर्शी होगी नई अर्थव्‍यवस्‍था : जयंत


jayant sinha


एक अंग्रेजी अखबार में लिखे अपने लेख में जयंत सिन्हा ने कहा है कि हाल के दिनों में अर्थव्यवस्था के मुद्दे पर कई तरह के लेख लिखे गए, जिनमें तथ्यों की कमी रही है। उन्होंने लिखा कि केंद्र सरकार जो बदलाव कर रही है, वह न्यू इंडिया की जरूरत है। जो नई अर्थव्‍यवस्‍था तैयार हो रही है, वह ज्यादा पारदर्शी होगी, जिसमें लाखों लोगों को नौकरी मिलेगी। जयंत ने लिखा कि जीएसटी, नोटबंदी और डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा एक गेमचेंजिंग कोशिश है, जिसका असर लंबे समय में दिखेगा। हर मंत्रालय नई तरह की पॉलिसी बना रहा है। अब कोयला की नीलामी भी सही तरीके से हो रही है। इस सरकार के कार्यकाल में एफडीआई के आंकड़ों में काफी बढ़ोतरी हुई है। जनधन-आधार-मोबाइल (जैम) की सहायता से हम डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर कर रहे हैं, जिससे पिछले तीन साल में 1.75 लाख करोड़ रुपये तक सीधा लोगों के खाते में जा रहे हैं और लीकेज बंद हो रही है।


अर्थव्‍यवस्‍था की सुस्‍त रफ्तार पर यशवंत ने केंद्र को घेरा था


yashwant sinha


इससे पहले बुधवार को बीजेपी के वरिष्‍ठ नेता यशवंत सिन्‍हा ने एक अंग्रेजी अखबार में लिखे अपने लेख में अर्थव्‍यवस्‍था की सुस्‍त रफ्तार पर केंद्र सरकार को घेरा था। इसके लिए केंद्र सरकार की नीतियों को जिम्‍मेदार ठहराया था। उन्‍होंने कहा था कि बीजेपी में कई लोग यह जानते हैं कि अर्थव्‍यवस्‍था की रफ्तार धीमी हो रही है, लेकिन डर के मारे बोल नहीं पा रहे हैं। ‘I need to speak up now’ शीर्षक से प्रकाशित लेख में सख्‍त लहजे में अर्थव्‍यवस्‍था में गिरावट के लिए नोटबंदी और जीएसटी के निर्णयों को जिम्‍मेदार ठहराया था। जीडीपी के आंकड़ों पर भी सवाल उठाए थे। पूर्व वित्‍त मंत्री ने आयकर विभाग, प्रवर्तन निदेशालय और सीबीआई के छापों को लोगों के दिमाग में भय उत्‍पन्‍न करने वाला गेम बताया। साथ ही यह भी जोड़ा था कि जब बीजेपी विपक्ष में थी, तो वह इस तरह की कार्रवाइयों का विरोध करती थी, लेकिन अब ऐसा नियमित रूप से हो रहा है। लेख के अंत में वित्‍त मंत्री अरुण जेटली पर तंज कसते हुए लिखा था कि प्रधानमंत्री कहते हैं कि उन्‍होंने बेहद करीब से गरीबी देखी है। ऐसा लगता है कि उनके वित्‍त मंत्री भी ओवरटाइम काम करके यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि सभी भारतीयों को भी बेहद करीब से इस तरह का अनुभव होना चाहिए।


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