blogid : 321 postid : 1351212

प्लेन क्रैश में मरने वाले इस राजनेता की मौत कहानी इनके पूर्वजों से जुड़ी हुई है!

Posted On: 5 Sep, 2017 Politics में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

महाभारत काल से ही श्राप बहुत प्रसिद्ध रहे हैं. ऐसा माना जाता है श्राप कभी न कभी अपना प्रकोप जरूर दिखाते हैं. वो चाहे गांधारी द्वारा श्रीकृष्ण को दिया गया श्राप हो या अश्वत्थामा को श्रीकृष्ण से मिला श्राप हो, समय आने पर सही साबित हुआ है. इसी तरह हम फिल्मों में भी देखते हैं कि किसी परिवार के पूर्वजों को मिला श्राप उनकी कई पीढ़ियां सदियों से भुगत रही है. जैसे आपको बॉलीवुड की शापित फिल्म तो याद ही होगी, जो श्राप पर आधारित थी. इसी तरह बॉलीवुड में कई फिल्में श्राप के इर्द-गिर्द घूमती है.


madhav

लेकिन क्या आपने सोचा है कि श्राप सिर्फ पुराने समय या फिल्मों में ही नहीं हुआ करते बल्कि असल जीवन में भी मिले श्राप का प्रभाव पड़ता है. आइए, हम आपको बताते हैं एक देश के एक मशहूर परिवार को मिले श्राप के बारे में. आपको मशहूर राजनेता माधव राव सिंधिया तो याद ही होंगे, जिनकी एक हवाई दुर्घटना में मौत हो गई थी. सिंधिया के शाही परिवार के बारे में ग्वालियर में एक कहानी बहुत प्रचलित, जिसके अनुसार सिंधिया परिवार को एक श्राप मिला था.


madhav 3

दरअसल, यहां के कई लोग सिंधिया परिवार के इतिहास से जुड़ी एक कहानी बताते हैं, जिसके अनुसार के एक बार महादजी सिंधिया को एक संत मिले, जिन्होंने महादजी को एक रोटी उनकी पत्नी को खाने के लिए दी. जिससे उनके घर में सुख और समृद्धि हमेशा बनी रहे. महादजी ने ऐसा ही किया लेकिन उनकी पत्नी ने सिर्फ आधी ही रोटी खाई, बाकी रोटी फेंक दी. ये देखकर संत बहुत गुस्से में आ गए और उन्होंने पूरे सिंधिया परिवार को श्राप दिया कि उनकी सात पीढियां कभी भी 55 साल से ज्यादा जीवित नहीं रह पाएगी. साथ ही उनके राजवंश का दबदबा ग्वालियर से खत्म हो जाएगा. साथ ही ऐसा भी कहा जाता है कि इनके परिवार में जिस किसी का नाम भी ‘M’ से शुरू होगा, उसकी किसी हादसे में मृत्यु हो जाएगी. इसके अलावा इस राजवंश में एक बेटे से अधिक नहीं जन्म लेगा.

अब इस श्राप में कितनी सच्चाई है ये दावे के साथ तो कहा नहीं जा सकता, लेकिन श्राप की ये कहानी ग्वालियर में दशकों से चलती आ रही है…Next

Read More:

पहली बार संसद पहुंचे भाजपा के ‘चाणक्‍य’, जानें अमित शाह के बारे में ये 10 बड़ी बातें

राजनीति में एक मिसाल, भाई मुख्‍यमंत्री पर बहन चलाती है फूल-माला की दुकान

अब तक तीन रेलमंत्री दे चुके हैं ‘नैतिक’ इस्‍तीफा, पर एक बड़े नेता का इस्‍तीफा नहीं हुआ था मंजूर



Tags:                   

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

0 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments


topic of the week



अन्य ब्लॉग

latest from jagran