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... तो जेडीयू को थी केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्‍तार से उम्‍मीद, जगह नहीं मिलने से निराश है पार्टी!

Posted On: 5 Sep, 2017 Politics में

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केंद्रीय मंत्रिमंडल में विस्‍तार की खबरें आने के बाद से नीतीश कुमार की जेडीयू भी चर्चा में आ गई थी। कयास लगाए जा रहे थे कि ‘घर वापसी’ के बाद जेडीयू को भी केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह मिलेगी। मगर मंत्रिमंडल विस्‍तार में जेडीयू को जगह नहीं मिलने से तमात सियासी पंडित हैरान हैं। उन्‍हें समझ नहीं आ रहा है कि हाल ही में एनडीए में शामिल होने वाली जेडीयू को आखिर मंत्रिमंडल में जगह क्‍यों नहीं मिली। वहीं, पार्टी के दिग्‍गजों की प्रतिक्रिया देखें, तो ऐसा लगता है कि कहीं न कहीं जेडीयू को भी इसकी आस थी कि उन्‍हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह मिलेगी। पार्टी अध्‍यक्ष नीतीश कुमार मंत्रिमंडल विस्‍तार में उनकी पार्टी का नाम लिये जाने को बेवजह तो करार दे रहे हैं, लेकिन पार्टी महासचिव के बयान से कुछ और ही समझ आता है।


modi


बयान बता रहे जेडीयू की निराशा!


nitish kumar


बिहार के मुख्‍यमंत्री और जेडीयू अध्‍यक्ष नीतीश कुमार ने इस बारे में कहा है कि मंत्रिमंडल विस्‍तार में उनकी पार्टी का तो नाम ही बेवजह लिया गया। उन्‍होंने कहा कि मंत्रिमंडल में उनकी पार्टी के लोगों को शामिल किए जाने को लेकर कोई बात ही नहीं हुई थी। पार्टी के बारे में जो भी बात होगी, मैं खुद सबको बता दूंगा। अपने आप ही मीडिया सब चला रहा है। वहीं, नीतीश के इस बयान को पार्टी महासचिव का बयान काटता हुआ नजर आ रहा है। पार्टी महासचिव केसी त्‍यागी के बयान में निराशा साफ देखी जा सकती है। त्‍यागी ने कहा कि मंत्रिमंडल में शामिल न किए जाने से हम निराश नहीं हैं। मगर हमें उम्मीद थी कि जिस तरह बिहार में बीजेपी-जेडीयू मिलकर सरकार चला रहे हैं, वैसे ही केंद्र में भी जेडीयू को मौका मिलेगा। अफसोस है कि इस वजह से विरोधियों को तंज करने का मौका मिल गया है।


‘वाजपेयी कार्यकाल से बहुत अलग है आज का एनडीए’


sharad yadav


जेडीयू के बागी नेता शरद यादव का बयान इन दोनों से जुदा है। मंत्रिमंडल विस्तार में जेडीयू को शामिल नहीं करने के बारे में शरद कहते हैं कि ये तो उनसे (JDU) पूछें। मैं इस विस्तार का स्वागत करता हूं। शरद यादव ने कहा कि केंद्र सरकार ने कालेधन, दो करोड़ रोजगार देने समेत जो तमाम वादे किए थे, उस दिशा में कोई काम पिछले तीन साल में नहीं हुआ। हो सकता है कि ये नए चेहरे इन वादों को पूरा करने के लिए कुछ काम करें। शरद ने इसी बहाने एनडीए पर तंज किया। उन्‍होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल की तुलना में आज का एनडीए बहुत अलग है। इसमें अगर शिवसेना को निकाल दिया जाए, तो बाकी सहयोगी दुअन्नी-चवन्नी पार्टियां ही हैं।


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