blogid : 321 postid : 1350093

जिस कांग्रेस से राजनीति में आए उसी के खिलाफ इस नेता ने लड़ा था ‘महामहिम’ चुनाव

Posted On: 1 Sep, 2017 Politics में

Avanish Kumar Upadhyay

  • SocialTwist Tell-a-Friend

एक ऐसा नेता, जो नौ बार सांसद, लोकसभा अध्‍यक्ष और मेघालय का मुख्‍यमंत्री रहने के बावजूद राजनीति के ग्‍लैमरस चेहरों में नहीं गिना जाता था। मगर 2012 के राष्‍ट्रपति चुनाव में प्रत्‍याशी बनने के बाद पूरे देश में जाना-पहचाना जाने लगा। वो थे पूर्णो अगिटोक संगमा (पीए संगमा)। संगमा लोकसभा अध्‍यक्ष बनने वाले नॉर्थ ईस्‍ट के पहले व्‍यक्ति थे। संगमा ने युवा कांग्रेस से राजनीतिक जीवन शुरू किया और राष्‍ट्रपति चुनाव में उसी कांग्रेस के खिलाफ बतौर प्रत्‍याशी मैदान में उतरे। 2016 में 68 वर्ष की उम्र में दुनिया को अलविदा कहने वाले पीए संगमा का आज जन्‍मदिन है। आइये जानते हैं उनके बारे में कुछ खास बातें।


P A sangma


मेघालय के एक गांव में हुआ था जन्‍म

पीए संगमा का जन्म 1 सितंबर, 1947 को पश्चिम गारो हिल्स, मेघालय के चपाथी ग्राम में हुआ था। शिलांग से स्नातक डिग्री प्राप्त करने के बाद संगमा ने असम के डिब्रुगढ़ विश्वविद्यालय से अंतरराष्ट्रीय संबंध में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने एलएलबी की परीक्षा भी उत्तीर्ण की।


1973 में बने प्रदेश युवा कांग्रेस समिति के अध्यक्ष

सन् 1973 में पीए संगमा मेघालय प्रदेश युवा कांग्रेस समिति के अध्यक्ष निर्वाचित हुए। कुछ समय बाद ही वे इस समिति के महासचिव नियुक्त किए गए। 1975 से 1980 तक संगमा प्रदेश कांग्रेस समिति के महासचिव रहे।


pa sangma1


1977 में पहली बार बने सांसद

सन् 1977 के लोकसभा चुनावों में पीए संगमा तुरा निर्वाचन क्षेत्र से जीत दर्ज करने के बाद पहली बार सांसद बने। इसके बाद मात्र 9वीं लोकसभा को छोड़कर वे 14वीं लोकसभा चुनावों तक यहां से लगातार जीतते रहे।


मुख्‍यमंत्री और लोकसभा अध्यक्ष

सन् 1980-1988 तक पीए संगमा केंद्र सरकार के अंतर्गत विभिन्न पदों पर कार्यरत रहे। सन् 1988-1991 तक वे मेघालय के मुख्यमंत्री रहे। कांग्रेस में रहते हुए ही 1996 में वह दिन भी आया जब वे लोकसभा के अध्यक्ष के तौर पर चुने गए। उनके बोलने का ढंग ही वहां मौजूद सांसदों के चेहरे पर मुस्कान ला देती थी।


pa sangma


कांग्रेस छोड़कर की एनसीपी की स्‍थापना

सन् 1999 में कांग्रेस से निष्कासित होने के बाद शरद पवार और तारिक अनवर के साथ मिलकर पीए संगमा ने नेशनल कांग्रेस पार्टी की स्थापना की। इसके बाद कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी से शरद पवार की नजदीकी बढ़ जाने के कारण पीए संगमा ने अपनी पार्टी का ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस पार्टी में विलय कर नेशनलिस्ट तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की। 10 अक्टूबर, 2005 को अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के सदस्य के तौर पर लोकसभा पद से इस्तीफा देने के बाद पीए संगमा फरवरी 2006 में नेशनल कांग्रेस पार्टी के प्रतिनिधि के तौर पर संसद पहुंचे। 2008 के मेघालय विधानसभा चुनावों में भाग लेने के लिए उन्होंने 14वीं लोकसभा से इस्तीफा दे दिया।


राष्ट्रपति चुनाव के लिए छोड़ी पार्टी

2012 के राष्ट्रपति चुनाव में बतौर प्रत्‍याशी खड़े होने के लिए पीए संगमा को नेशनल कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा देना पड़ा। दरअसल, पार्टी सुप्रीमो शरद यादव नहीं चाहते थे कि वे प्रणब दा को इस पद के लिए चुनौती दें। लिहाजा उन्होंने संगमा को ऐसा न करने की हिदायत भी दी थी। चुनाव लड़ने के लिए उन्होंने पार्टी से इस्तीफा देना ही उचित समझा। इसके बाद एनडीए ने राष्ट्रपति पद के लिए पीए संगमा को अपने उम्मीदवार के रूप में घोषित किया।


Read More:

बिहार में फिर सुनाई देने लगी वो 'समोसे में आलू' वाली कहावत
 'रेप' और 'मैरिटल रेप' में क्‍या है फर्क, जानें विवाह की संस्था का इससे संबंध
कभी चेतावनी तो कभी परिवर्तन, लालू की रैलियों के कैसे-कैसे नाम!



Tags:                     

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

0 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments


topic of the week



अन्य ब्लॉग

latest from jagran