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राजनीति से दूर रहना चाहते थे राजीव, पीएम बनने से खुश नहीं थी सोनिया

Posted On: 20 Aug, 2016 Politics में

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देश की राजनीति में गांधी परिवार का एक अहम रोल रहा है. गांधी परिवार को आज देश के राज परिवार के समान देखा जाता है जहां पैदा होने वाले हर बेटे को लोग देश का राजकुमार समझते हैं. ऐसे ही एक राजकुमार थे राजीव गांधी. युवा भारत और संचार क्रांति के अग्रदूत के रूप में मशहूर राजीव गांधी.


राजनीति से दूर रहना चाहते थे राजीव

राजीव गांधी स्वभाव से बेहद सरल और सीधे थे. उनके बारे में ये माना जाता था कि वह राजनीति में नहीं आना चाहते थे, लेकिन पहले भाई संजय गांधी की विमान हादसे में मौत और फिर मां इंदिरा गांधी की हत्या की वजह से उन्हें राजनीति में आना पड़ा. आइये जानते हैं कि राजीव गांधी के जीवन से जुड़ी कहानी.


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सबसे बड़े राजनीतिक घराने में जन्म

20 अगस्त, 1944 को जन्में इंदिरा गांधी और फिरोज गांधी की सबसे बड़ी संतान राजीव गांधी ने माध्यमिक शिक्षा राजीव गांधी ने शुरुआती शिक्षा देहरादून के मशहूर दून स्कूल से ली. 1961 में वह लंदन चले गये और वहां पर उन्होंने कैंब्रिज के ट्रिनिटी कॉलेज और इम्पीरियल कॉलेज से उच्च शिक्षा हासिल की थी.


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कैसे हुआ सोनिया से प्यार

राजीव गांधी ने कैंब्रिज के ट्रिनिटी कॉलेज और लंदन के इम्पीरियल कॉलेज से उच्च शिक्षा हासिल की थी. और इसी दौरान उनकी मुलाकात सोनिया से हुई, सोनिया गांधी का नाम शादी से पहले एंटानियो माइनो था. सोनिया का परिवार इस शादी के खिलाफ था लेकिन सोनिया ने 28 फरवरी 1968 को राजीव से शादी कर ली.


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भाई की मौत ने दिया राजीव को बड़ा झटका

23 जून 1980 को संजय गांधी की एक विमान हादसे में मौत हो गई थी. ऐसा माना जाता है कि संजय गांधी की अगर मौत नहीं हुई होती तो इंदिरा गांधी के बाद देश की कमान वह ही संभालते. संजय गांधी की मौत के बाद राजीव गांधी मां इंदिरा गांधी के सहयोग के लिए राजनीति में आ गये.


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1984 में देश ने अपनी महिला प्रधानमंत्री को खो दिया

देश की आर्यन लेडी और भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री को उन्ही के बॉडीगार्ड ने गोलियों से छल्ली कर दिया था. मां की हत्या के बाद राजीव ने सत्ता संभालने की बात कही गई और वो तैयार हो गए. कहा जाता है कि सोनिया उनके इस फैसले से बेहद दुखी थी और वो नहीं चाहती थी कि राजीव राजनीति में आएं.



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देश को बहुत कुछ दिया बतौर पीएम

उन्होंने देश में कई क्षेत्रों में नई पहल और शुरुआत की जिनमें संचार क्रांति और कंप्यूटर क्रांति, शिक्षा का प्रसार, 18 साल के युवाओं को मताधिकार, पंचायती राज आदि शामिल हैं. राजीव ने कई साहसिक कदम उठाए जिनमें श्रीलंका में शांति सेना का भेजा जाना, असम समझौता, पंजाब समझौता, मिजोरम समझौता आदि शामिल हैं.



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अमिताभ और राजीव हुआ करते थे गहरे दोस्त

अमिताभ की मां तेजी बच्चन और पिता हरिवंश राय बच्चन के देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू से करीबी रिश्ते थे. इसी रिश्ते की वजह से अमिताभ बच्चन और राजीव गांधी की दोस्ती हुई. ऐसा कहा जाता है कि इंदिरा गांधी अमिताभ बच्चन को भी बेटे की ही तरह मानती थीं. अमिताभ के करीबी बताते हैं कि सुपर स्टार की सबसे अच्छी तस्वीर राजीव गांधी ने ही खींची थे.  लेकिन राजीव के जाने के बाद सोनिया और राहुल गांधी से बिग बी और उनके परिवार के संबंध ठीक नहीं रहे.



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21 मई 1991 को दुनिया को अलविदा कह गए राजीव

श्रीलंका में लिट्टे और सिंघलियों के बीच युद्ध शांत करने के लिए राजीव गांधी ने भारतीय सेना को श्रीलंका में तैनात कर दिया, जिसका प्रतिकार लिट्टे ने तमिलनाडु में चुनावी प्रचार के दौरान राजीव गांधी पर आत्मघाती हमला करवाया. चेन्नई के पास एक कार्यक्रम में महिला आत्मघाती हमलावर ने राजीव गांधी को बम से उड़ा दिया. वह महिला 21 मई 1991 को सुबह 10 बजे राजीव गांधी से मिलने के लिए स्टेज तक गई और उनके पांव छूने के लिए झुकी. वह महिला आत्मघाती थी और उसके शरीर में जैकेट बम था. उसने राजीव गांधी के पैर छूने के बहाने खुद को उड़ा लिया.



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भारत रत्न से हुए सम्मानित

राजीव गांधी की देश सेवा को राष्ट्र ने उनके दुनिया से विदा होने के बाद स्वीकार करते हुए उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया जिसे सोनिया गांधी ने छह जुलाई, 1991 को अपने पति की ओर से ग्रहण किया…Next


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