blogid : 321 postid : 1129304

दिल्ली के ऑड-ईवन फॉर्मूले से सरकारी खजाने में आया इतना पैसा

Posted On: 7 Jan, 2016 Politics में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

अब तो केजरीवाल को पानी पी-पीकर गरियाने वाले भी यह स्वीकार करने लगे हैं कि दिल्ली में ऑड-ईवन फॉर्मूला अपने उद्देश्यों में कामयाब रहा है. हालांकि इस एहसास के बाद भी मीडिया में ऑड-ईवन के खिलाफ ज्यादा सुर सुनाई दे रहा है. ऐसा क्यों है इसके लिए आपको मीडिया का सामाजशास्त्र और इस योजना के सामाजिक असर दोनों को समझना पड़ेगा. सबसे पहले मीडिया के सामाजशास्त्र कि बात करें तो इस बात पर चर्चा जरूरी है कि मीडिया में आखिर सुनी किसकी जाती है.


odd even 1



आम तौर पर मीडिया में उन्हीं सुविधा संपन्न लोगों की ही आवाज सुनाई देती है जो दिल्ली जैसे शहर में कार रखना अफोर्ड कर सकते हैं. इस वर्ग ने अपने लिए कोठियों और अपार्टमेंटों, एसयूवी और लग्जरी कारों और एयर कंडीशन्ड ऑफिसों में अपनी सुविधा के सारे साधन बटोर रखे हैं. इस वर्ग के अधिकांश लोग अपने ऐशो-आराम के साधन बटोरने में इस तरह मशगूल रहते हैं कि उन्हें यह सोचने की फुर्सत ही नहीं है कि उनके इस एशो-आराम से दूसरों पर और पर्यावरण पर क्या असर पड़ता है. जिन्हें रोज-रोज कार में बैठने की लत है, वह भले ही घंटों जाम में फंसे रहें लेकिन उसे इस बात की तसल्ली रहती है कि वह कार में बैठा हुआ है. ऑड-ईवन फॉर्मूले की वजह से दिल्ली की सड़के फिर से सांस लेने लगी हैं. वायु की क्वालिटी पर भी इससे असर पड़ा है और इसमें कुछ सुधार हुआ है. लेकिन इसके लिए दिल्ली सरकार को एक बड़ी कीमत भी चुकानी पड़ी है.


Read: गजब! अपने हुनर से इस लड़के ने बना दी जेसीबी मशीन


दिल्ली सरकार द्वारा ऑड-ईवन फॉर्मूले के लिए जिन अतिरिक्त बसों को लगाया है उसका ही खर्च रोजाना करीब तीन करोड़ आ रहा है जबकि टिकटों की बिक्री से मात्र 20 लाख रुपए की आमदनी हो रही है. मीडिया में आई खबरों के अनुसार ऑड ईवन फॉर्मूले के लागू होने के बाद जहां डीटीसी बसे खाली जा रही हैं वहीं दिल्ली मेट्रो की राइडरशिप बढ़ी है. खाली जा रही बसो के कारण डीटीसी को नुकसान हो रहा है वहीं मेट्रों में भीड़ बढ़ गई है. लेकिन ऐसा नहीं है कि इस योजना से सिर्फ नुकसान ही हो रहा है. इसके कारण सरकारी खजाना भी भर रहा है.



PTI1_4_2016_000267A



इस योजना के लागू होने के 5 दिन में दिल्ली पुलिस ने 38 लाख से ऊपर जुर्माने के रूप में वसूल चुकी है. ऐसा अनुमान है कि 15 दिन के इस पायलट प्रोजेक्ट के दौरान दिल्ली पुलिस 1 करोड़ से ऊपर जुर्माने के रूप में वसूल लेगी.



Delhi-odd-even



इस योजना का बजट नकारात्मक है या सकारात्मक इस पर अर्थशास्त्री लंबी बहस कर सकते हैं, लेकिन विश्व के किसी भी मुद्रा में घुटन मुक्त सांस की कीमत नहीं लगाई जा सकती. खासकर समाज के उस वर्ग के लोगों की सांस की कीमत जो जहरीली हवा में जिंदा रहने के लिए बोतलबंद शुद्ध हवा नहीं खरीद सकते. ज्ञात हो कि हाल ही में आई एक खबर के अनुसार चीन के बीजिंग शहर में शुद्ध हवा की बोतल की मांग जोरो पर है, जहां एक बोतल की कीमत करीब 1850 रुपए है. ऑड-ईवन योजना तो बस शुरुआत भर है अगर दिल्ली को बीजिंग की स्थिति में जाने से रोकना है तो कई अन्य उपाय भी करने पडेंगे. Next…


Read more:

ये है दुनिया की पहली कार वेंडिंग मशीन जिससे होगी कारों की डिलीवरी

पानी से चलने वाली कार बनाने का दावा किया इस भारतीय मैकेनिक ने

यहां पुलिस की इन महंगी कारों में बैठने के लिए लोग होते हैं खुद गिरफ्तार



Tags:               

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

1 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

vivek kumar के द्वारा
January 8, 2016

They were watching us twisted twisted, We were looking for Twisted Twisted them, That we, we, We, uh, we, In the test … Some did not make them, not us !!!


topic of the week



अन्य ब्लॉग

latest from jagran