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चुनावी समर में इन नारों ने किया बहुत कमाल

Posted On: 28 Sep, 2015 Politics में

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देश के किसी भी चुनाव में नारों का महत्वपूर्ण स्थान रहा है. नारे किसी भी राजनीतिक दल के विचार और सोच को व्यक्त करने का माध्यम है. इतिहास ऐसे कई उदाहरणों से भरा पड़ा है जब कम संसाधनों के बावजूद केवल नारों और प्रभावी भाषणों के बल पर चुनाव को जीता गया है. चुनाव में नारों की अहमियत तब भी थी और अब भी है. आज जनता और पार्टी के कार्यकर्ताओं में जोश भरने के लिए ऐसे नारों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है. कई बार प्रभावी नारे चुनाव में जनता के रुझान को बदल देते हैं. आइए आजाद भारत के प्रमुख नारों पर नजर दौड़ाते हैं.


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जय जवान जय किसान: इस नारे को आजाद भारत का सबसे ज्यादा लोकप्रिय नारा माना जाता है. 1965 में पाकिस्तान के साथ युद्ध विजय के बाद भारतीय जवानों और किसानों के सम्मान में इस नारे को तत्कालीन भारत के प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने दिया था. इस नारे ने कांग्रेस को 1967 के लोकसभ चुनाव में जीत दिलाई.



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गरीबी हटाओं- 1971 में कांग्रेस का यह नारा बहुत सफल रहा. इस नारे और इंदिरा गांधी को सुनने के लिए लाखों की संख्या में लोग जुटते थे. इस नारे के दम पर कांग्रेस को भारी जीत हासिल हुई.


इंदिरा हटाओं देश बचाओ- 1977 में जयप्रकाश नारायण ने इंदिरा गांधी पर सीधा निशाना साध दिया. इस नारे ने कांगेस की सत्ता को उखाड़ फेंक दिया था और जनता पार्टी की सरकार बनी. आपातकाल के बाद जनता में इंदिरा गांधी को लेकर भारी रोष था. जयप्रकाश नारायण ने और भी कई नारे दिए जो काफी लोकप्रिय हुए.



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सम्पूर्ण क्रांति- उस काल में दिनकरजी की यह कविता बाद में नारा बन गया. “सम्पूर्ण क्रांति अब नारा है, भावी इतिहास तुम्हारा है”, “ये नखत अमा के बुझते हैं, सारा आकाश तुम्हारा है.  इमरजेंसी के समय ये नारे लोगों की जुबान पर थे- ”जमीन गई चकबंदी में, मकान गया हदबंदी में, द्वार खड़ी औरत चिल्लाए, मेरा मर्द गया नसबंदी में”


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आधी रोटी खाएंगे, इंदिरा जी को लाएंगे- जनता पार्टी के ढ़ाई साल के शासन से त्रस्त जनता की भावनाओं को भाप कर कांग्रेस ने अपने पक्ष में माहौल तैयार करने के लिए यह नारा दिया था. तब यह नारा खूब चला “आधी रोटी खाएंगे, इंदिरा जी को लाएंगे”.


जब तक सूरज चाँद रहेगा इंदिरा तेरा नाम रहेगा- 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद यह नारा बहुत चर्चित हुआ. इस नारे ने पूरे देश में सहानुभूति की लहर पैदा की थी. नतीजा यह हुआ कि कांग्रेस को भारी मतों से जीत हासिल हुई.


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राजा नहीं फकीर है देश की तकदीर है- 1989 के चुनाव में यह नारा बहुत लोकप्रिय हुआ. उस समय यह नारा वीपी सिंह के लिए तैयार किया गया था. इस नारे में फकीर वीपी सिंह को कहा गया था.



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सौगंध राम की खाते हैं हम मंदिर वहीं बनाएंगे- राम मंदिर आंदोलन के समय इस नारे ने मंदिर समर्थकों को आंदोलित किया था. बाबरी ध्वंस के बाद यह नारा आया- “ये तो पहली झांकी है, काशी मथुरा बाकी है”.



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अबकी बारी अटल बिहारी- 1998 में यह नारा लोगों की जुबान पर पूरी तरह से चढ़ गया था.Next…


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