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गांधी के साथ हिटलर ने दिलवाई थी भारत को आजादी !!!

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महात्मा गांधी का नाम कौन नहीं जानता है, एक ऐसा इंसान जिसने देश को अहिंसा का मार्ग दिखलाया, उन्हें स्वराज का अर्थ समझाया और अपनी एक-एक सांस देश के नाम कर दी. वैसे तो मोहनदास करमचंद गांधी कोई ऐसा नाम नहीं है जिसे भुला दिया जाए लेकिन स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्वों के अवसर पर ‘बापू’ के बलिदान, उनके आदर्शों को जरूर याद किया जाता है.

Mahatma Gandhi and Hitler


लेकिन यहां हम आपको जो बताने जा रहे हैं उसे सुनकर हर उस भारतीय जो महात्मा गांधी को स्वतंत्रता संग्राम का नायक मानता है, को थोड़ा अटपटा जरूर लगेगा। वैसे जो हम आपको बताने जा रहे हैं उससे हम भी कुछ ज्यादा इत्तेफाक नहीं रखते या यूं कहें वह हमारे लिए भी संदेहास्पद ही है लेकिन अब जब ऐसी चर्चाएं हो रही हैं तो हमारा भी कर्तव्य बनता है कि इन सब चर्चाओं से आपको अवगत करवाएं.


बहुत से लोगों का कहना है कि भारत को स्वतंत्रता दिलवाने में महात्मा गांधी का नहीं बल्कि एडोल्फ हिटलर का योगदान था. कई ऐसे भारतीय हैं जिनका मानना है कि महात्मा गांधी के अहिंसा आंदोलन का स्वतंत्रता से कोई लेना देना नहीं है जबकि भारत की स्वतंत्रता और दूसरे विश्वयुद्ध का आपस में बहुत गहरा संबंध है.


असल में 1944 को समाप्त हुए दूसरे विश्वयुद्ध के परिणामस्वरूप ब्रिटिश सेना काफी कमजोर हो गई थी. ऐसे हालातों में ब्रिटेन का भारत पर शासन करना और आने वाली कठिनाइयों का सामना करना काफी मुश्किल हो गया था. इसीलिए उन्होंने जल्द से जल्द भारत को आजाद करने का फैसला लिया. महात्मा गांधी के अहिंसा आंदोलनों की वजह से भारत को स्वतंत्रता मिलना वाकई मुश्किल था.

Mahatma Gandhi – अहिंसा और सत्य के पुजारी महात्मा गांधी


उदाहरण के तौर पर वर्ष 2011 में जब समाजसेवी अन्ना हजारे सशक्त लोकपाल बनाने जैसे मुद्दे को लेकर अनशन पर बैठे थे तब भी अन्ना हजारे ने कहा था कि वह मरते दम तक भ्रष्टाचार के विरुद्ध अपनी लड़ाई जारी रखेंगे. शुरुआत में ऐसा माना जा रहा था कि अन्ना हजारे सरकार को कड़ी चुनौती देंगे और उनके आमरण अनशन के आगे सरकार झुक जाएगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ क्योंकि कुछ दिनों बाद अन्ना को अपना अनशन तोड़ना पड़ा और भी बिना किसी मजबूत सरकारी आश्वासन के.


आशय स्पष्ट है कि अहिंसा के मार्ग पर चलकर गांधी जी के भारत को स्वतंत्रता दिलवाने जैसी बात बहुत से लोगों को बेमानी प्रतीत होती है.

गांधी के सपनों का भारत

अंधेरे से क्यों डरते थे महात्मा गांधी ?

हर चोट बनेगी ताबूत की कील

Web Title : freedom fight movement and gandhi hitler



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7 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

alok pandey के द्वारा
December 4, 2014

भारत को आजदी गाँधी जी ने नहीं सुबास चन्द्र बोस ने दिलवाई थी. उन्होंने सेना में मौजूद भारतियों के मन को उद्देलित कर दिया था, इसी कारण ब्रिटिश सरकार ने आजाद हिन्द सैनिको कि फाँसी कि सजा को माफ़ कर दिया था . लेकिन अंततः यह आक्रोश सुलगता रहा और रॉयल इंडियन नेवी के भारतीय सैनिकों ने 18 फरवरी 1946 को एचआईएमएस तलवार नाम के जहाज से मुम्बई में अंग्रेजी सरकार के विरूद्ध मुक्ति संग्राम का उद्घोष कर दिया। नौसैनिकों का यह मुक्ति संग्राम इतना तीव्र था कि शीघ्र ही यह मुम्बई से चेन्नई, कोलकात्ता , रंगून और कराँची तक फैल गया। महानगर , नगर और गाँवों में अंग्रेज अधिकारियों पर आक्रमण किये जाने लगे तथा कुछ अंग्रेज अधिकारियों को मार दिया गया। उनके घरों पर धावा बोला गया तथा धर्मान्तरण व राष्ट्रीय एकता विखण्डित करने के केन्द्र बने उनके पूजा स्थलों को नष्ट किये जाने लगा । स्थान – स्थान पर मुक्ति सैनिकों की अंग्रेज सैनिकों के साथ मुठभेड होने लगी। उनलोगों का विद्रोह तो दबा दिया गया.       लेकिन गाँधी जी ने क्या किया?, उन्होंने उन सैनिको कि निंदा कर डाली. लगभग सभी बड़े नेताओ ने उनकी निंदा किया. लेकिन अंग्रेज फिर भी बहुत घबरा गए. उनलोग लग गया था कि जिस प्रकार का असंतोष भारतीय सेना में पनप रहा 1857 का इतिहास दुबारा दोहरा सकता है. तब तो अंग्रेजो को अपने देश भागने का भी मौका नहीं मिलेगा. अंग्रेजों को ज्ञात हो गया कि केवल गोरे सैनिको के भरोसे भारत पर राज नहीं किया किया जा सकता. तत्कालीन ब्रिटिस हाई कमिश्नर जॉन फ्रोमैन का मत था कि 1946 में रॉयल इंडियन नेवी के विद्रोह ( मुक्ति संग्राम ) के पश्चात भारत की स्वतंत्रता सुनिश्चित हो गई थी । 1947 में ब्रिटिस प्रधानमंत्री लार्ड एटली ने भारत की स्वतंत्रता विधेयक पर चर्चा के दौरान टोरी दल के आलोचकों को उत्तर देते हुए हाउस ऑफ कॉमन्स में कहा था कि- ‘हमने भारत को इसलिए छोडा, क्योंकि हम भारत में ज्वालामुखी के मुहाने पर बैठे थे’ (दि महात्मा एण्ड नेता जी , पृष्ठ -125 , लेखक – प्रोफेसर समर गुहा )     लेकिन भारतियों सैनिको में आजादी का जोस भरने वाले आजाद हिन्द सैनिको को क्या मिला. उनको आजादी के बाद आतंकवादी का तमगा पहना दिया गया. जब डॉ श्यामा प्रशाद मुखर्जी ने नेहरु से आजाद हिंद फ़ौज के पूर्व सैनिको को भारतीय सेना के मानदंड पर पेंशन और भारतीय सेना अपने सैनिको को रिटायर के बाद जो सुविधा देती है वो सब देने का प्रस्ताव रखा था, तो नेहरु ने कहा की “मै आजाद हिंद फ़ौज को मान्यता नही देता , ये एक आतंकवादी कृत्य था . मै किसी निजी सेना बनाने के खिलाफ हूँ भले ही उसका इस्तेमाल देश के लिए हो, इसलिए मै ऐसे किसी भी प्रस्ताव को स्वीकार नही करूँगा |” ये संसद के रिकार्ड मे है।

AMRIT SINGH के द्वारा
October 13, 2014

100 % सच

s.p.singh के द्वारा
October 7, 2014

बहुत अफसोश होता है जब आप जैसा प्रबुद्ध व्यक्ति एक साधारण व्यक्ति अन्ना हजारे से महात्मा गांधी की तुलना करता है ? आपकी यह बात सही है की दूसरे विश्व युद्ध में ब्रिटेन टूट चूका था शायद इस लिए उन्होंने भारत से अपना बोरिया बिस्तर बांधना उचित समझा था |

डा श्याम गुप्त के द्वारा
February 13, 2014

                   यह सच है कि भारतीय स्वतंत्रता के लिए .तात्कालिक विश्व परिस्थितियाँ ..कारण बनीं ..जैसे… .१. ब्रिटेन व अन्य योरोपीय संगठन के देशों का लगातार राजनैतिक रूप से कमजोर होते जाना, जिसका कारण हिटलर का अभुदय कहा जा सकता है….  २. ब्रिटेन में प्रधान मंत्री एटली की लेबर पार्टी की सरकार का आना….एवं अब कमजोर ब्रिटेन द्वारा भारत को सम्हाल पाना मुश्किल होगया था.. .३. विश्व में अमेरिका-गणतंत्र  का अभुदय एवं तानाशाही व राजशाही परम्पराओं का अंत होते जाना..              परन्तु साथ ही साथ यह भी सच है कि — १.मूल रूप में ब्रिटेन समस्त भारत का आर्थिक शोषण कर चुका था लुटा-पिटा..गरीब..दीन-हीन भारत अब उनके किसी कम का नहीं रह गया था .. २. महात्मा गांधी एवं कांग्रेस के आन्दोलन जिसे समस्त भारतीय जनता का करो य मरो रूप में पूर्ण सक्रिय समर्थन प्राप्त था ..ने ब्रिटेन साम्राज्य के ताबूत में आख़िरी आवश्यक कील ठोकने का कार्य किया ऑ                    अतः निश्चय ही हम महात्मा गांधी के कार्य के महत्त्व को कम नहीं कर सकते ..

ajaykumarsingh के द्वारा
October 2, 2013

बकवास

bharodiya के द्वारा
August 17, 2013

आप इत्तेफाक रखिए, दूसरी साईडमें जो लोग कहते हैं वो सच है लेकिन आधा सच है । हकिकतमें बेन्कर्स ब्रिटन के साम्राज्य को ही तोडना चाहते थे । माना की ब्रिटन का ताज बेंकर माफिया का गुलाम था लेकिन ये माफिया किसी को चांच नही देते । अगर कोइ सरफिरा सम्राट आ जाता तो बेंकरों की ही खाल उतार लेता । अपने वन वर्ल्ड, वन गवर्नमेंट के बीच कोइ भी आये उसे हटा देते हैं । भारत आने से पहले गांधी को पूरा ग्लोबलिस्ट बना दिया था, उन को भारत या भारत की जनता से कोइ प्यार नही था । पूरे पूरे थेयोसोफिस्ट और मेसन बन गये थे । अंग्रेज से वो बेन्कर्स के प्लान के हिसाब से ही लडे और बेंकर्स के प्यादों को राज दिलवा दिया । ये प्यादे आज धीरे धीरे भारत को ग्लोबल सरकार के हवाले कर रहे हैं । भले अभी उस सरकार ने आकार नही लिया लेकिन तैयारी पूरी है ।

    varun saroha के द्वारा
    October 2, 2014

    सो भरोदिया जी आप भी रोस्चिल्ड और मेसन थ्योरी क पखधर हैं जो यहूदियों को वर्ल्ड संचालक समझती है अगर ऐसा है तो आपको हिटलर का भी समर्थन करना चाहिए क्युकी हिटलर ही यहूदियों का सबसे बड़ा विरोधी था जैसा की बीबीसी ने कहा वह सही है क्यकि द्वित्य विश्वयुद्ध क पश्चात ब्रिटिश कमजोर हो गए थे और इसीलिए नेता जी सुभाष ने हिटलर से हाथ मिला क आज़ाद हिन्द फ़ौज़ का गठन किया था


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