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तो ये है बीजेपी को बहुमत मिलने का सबसे खास कारण

Posted On: 16 May, 2014 Politics में

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लोकसभा चुनावी संग्राम का महाकुंभ समाप्त हुआ और देखिए एक लंबे इंतजार के बाद परिणाम भी सामने आ रहे हैं. वैसे जाहिर तौर पर जो परिणाम आने हैं वह कहीं ना कहीं अपेक्षित भी थे इसलिए ये कहना कि लोकसभा चुनाव 2014 के नतीजे हैरान कर देने वाले हैं, सही नहीं होगा. कांग्रेस के लंबे शासनकाल पर विराम लगाते हुए बीजेपी एक बहुत बड़ी और उल्लेखनीय जीत हासिल करने की ओर है जो वाकई काबिल-ए-तारीफ है.


narendra modi

कांग्रेस के शासन में व्याप्त भ्रष्टाचार, बढ़ती महंगाई और सामाजिक अपराधों ने देश की जनता को इतना त्रस्त कर दिया कि वह एक विकल्प की तलाश में जुट गई और ये विकल्प उन्हें मिला भाजपा के रूप में. लेकिन इस सिक्के का एक और पहलू यह भी है कि इस चुनाव से देश में मौजूद धर्मनिर्पेक्षता को गहरा आघात पहुंचा है और यह साबित हो गया है कि देश की जनता विशेषकर युवा, कट्टरवाद को पूरा समर्थन देते हैं. शायद जनता विकल्प की नहीं कट्टर नेता की तलाश कर रही थी और उनकी ये तलाश मोदी ने पूरी कर दी.


modi

भाजपा की जीत को नरेंद्र मोदी की जीत माना जा रहा था और अब जब भाजपा ने चुनावी मैदान में अपने दम पर परचम लहरा दिया है तो जाहिर तौर पर यह जीत मोदी की ही है, वे मोदी जो अभी तक अपने सिर से गुजरात में हुए हिन्दू-मुसलमान दंगों का दाग धो नहीं पाए हैं. जिन्हें आज भी सांप्रदायिक छवि वाले नेता के तौर पर ही जाना जाता है और ऐसे बड़े आरोपों के बावजूद उन्हें मिला विशाल समर्थन यह स्पष्ट प्रमाणित करता है कि जिस धर्मनिर्पेक्षता की हम बात करते हैं, हमारे राजनीतिज्ञ कसमें खाते हैं, वह सिर्फ और सिर्फ किताबी बातें हैं क्योंकि जब बात वोट देकर अपनी सरकार चुनने की आती है तो कहीं ना कहीं हमारा सपोर्ट भी कट्टरवाद की ही तरफ बढ़ता है.


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इन 60 सालों में पहली बार स्वयं जनता ने यह साबित कर दिया है कि धर्मनिर्पेक्षता जैसी कोई भी बात उनके लिए मायने नहीं रखती. मोदी कट्टर हैं या नहीं, लेकिन उनकी सामाजिक छवि एक ऐसे लीडर की है जो संप्रदाय विशेष को महत्व देकर आगे बढ़ता है और ऐसी छवि वाले नेता के हाथ में देश की सत्ता सौंप देने का अर्थ है धर्मनिर्पेक्षता की अवधारणा को पूरी तरह नकार देना.

bjp


मोदी को समर्थन देकर इस बार देश की जनता ने एक विशेष प्रकार के फासिज्म की तरफ रुख किया है और नरेंद्र मोदी को उनकी उसी छवि के रूप में स्वीकार किया है जिस रूप में उन्हें प्रचारित किया जाता रहा है. देश की जनता ने स्वयं मोदी को वो चेहरा दिया है जो सांप्रदायिक नेता की पहचान है लेकिन फिर भी उनके नेतृत्व में भाजपा को जीत की राह पर आगे बढ़ा कर यह साबित कर दिया गया है कि धर्मनिर्पेक्षता की कोई भी अवधारणा भारत के लिए सटीक नहीं बैठती.

bjp


वैसे जो भी है सबसे बड़ी और गौर करने वाली बात तो यह है कि भाजपा ने बहुमत से जीत हासिल कर गठबंधन सरकार बनने की परंपरा को अपने दम पर तोड़ डाला है जोकि वाकई उसकी एक बड़ी उपलब्धि है क्योंकि पिछले कई सालों ने भारत को गठबंधन सरकार से ही काम चलाना पड़ रहा है. ऐसा गठबंधन जिसके टूटकर बिखरने की संभावनाएं हमेशा ही बनी रहती हैं.

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Web Title : loksabha election 2014 results importance for bjp



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8 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shambhu Goel के द्वारा
May 6, 2015

सत्य क्या है . गुजरात दंगा क्यों हुआ . हिंदुओं को एक ट्रेन की बोगी में ज़िंदा क्या जला देना कानूनी रूप से ठीक था . अगर हिंदुओं के गुस्से के कारण मुसलमानों के वजह बेवजह , कहीं कहीं बिना कहीं कसूर के, निरीह मुसलमानों को, मारा गया अनुचित होते हुए भी क्या यह गुस्सा गलत था . ऐसे ही मर जाने देना था हिंदुओं को और एक आह भी नहीं निकालनी थी , यही चाह रहे थे ये कानग्रेसिये . क्या उस दिन नरेंद्र मोदी गुजरात के सी.एम्. नहीं रहते और कांग्रेस पार्टी का ही राज रहता और ऐसा हो जाता तो क्या कांग्रेस का सी.एम्. इस घटना को रोक लेता . मोदीजी का दोष इतना ही था की उस दिन वो ही सी.एम् थे . क्या मोदीजी  गुजरात में सभी मुसलमानों को इस प्रदेश से बाहर कर दिए . नहीं , बल्कि मुसलमानों की जो स्थिति थी गुजरात में उससे मोदी जी के राज में पहले से बेहतर स्थिति में वहाँ के मुसलमान हैं . रह गया की सिक्का चलाना है ओपोसिसन द्वारा मोदीजी के विरुद्ध में . यह सिक्का फेल कर गया कांग्रेसियों का .दूसरा सिक्का गढा गया , भूमि अधिग्रहण बिल को तोड़ मरोड़ कर झूठी बातें और अफवाह फैलाई जा रही है युवराज जी को इसका ठेका भी कांग्रेसियों ने दे दिया है , तीसरा सिक्का मध्यम वर्गीय समाज को एक फिर बड़ा झूठ परोसा जा रहा है , और किसी के द्वारा नहीं , बल्कि युवराज जी ही द्वारा . कांग्रेसियों मे मन में एक ही बात है , यह भारत , ये भारतीय ,भारत की खदाने, भारत की कन्याकुमारी समुद्र तट की बालू जिसमें थोरियम ऑक्साइड है , भारत की अत्यंत दुर्लभ मूर्तियां , भारत का खजाना , भारत का सोना, हीरा , जवाहरात सब इनके पिताजी लोंगों का है , देख नहीं पा रहे हैं इतने खजाने पर इतने सम्पतियों पर मोदीजी का एज ए कस्टोडियन बनना .रोज के हिसाब से एक न एक झूठ , मनगढंत किस्सा लेकर चले आते हैं टी.वि. के सामने और बे फ़िक्र परोस रहे हैं सफ़ेद झूठ .

satish के द्वारा
May 20, 2014

लगता है जागरण वाले कॉंगेर्स की हार बर्दास्त नहीं कर पा रहे इसलिय मोदी जी को कट्टरवाद की बात कर रहे है

RK के द्वारा
May 16, 2014

Kyu bhai MODI SARKAR ke aane se tu itna tension me aa gaya ki tu kya likh raha tha, tujhe pta bhi nhi tha.

    satish के द्वारा
    May 20, 2014

    kay bat hai bhai ek dam sahi bat bol rahe ho aap

Pd mishra के द्वारा
May 16, 2014

जीत का कारण नीति है-vipadi dhairyam atha abhyudaye kshamaa sad asi vaakya pat`utaa yudhi vikramam yas`asi ca abhirucir vyasanam s`rutau prakruti siddham idam hi mhaatmanaam विपति धैर्यं अथ अभ्युदये क्षमा सदसि वाक्पटुता युधिष्ठिर विक्रमम् यशसि च अभिरुचिर व्यसनम् श्रुतौ प्रकृति सिद्दधम् इदं हि महात्मानाम् । भर्तृहरि नीति शतक ७/१ Great Challenges and most difficult convictions and practices = WALKING ON A SWORD: 1. Giving charities and keeping them secret; 2. Doing good and remaining silent; 3. Open praise in assemblies of good done by others; 4. Not losing balance even when rich; 5. Lack of interest in gossip stories of others;

anon modi fan के द्वारा
May 16, 2014

nahi aisa nahi hai…….jab desh me vikas hi nhi rahega……jab log bhukmari ke shikar rahenge…..jab logon ke pass khane ko bhojan or pehannane ko kapda hi nahi rahega to log secularism ko kese follow kar payenge…..desh ki janta ne modi je ko sirf isliye chuna h qki wo ek ache or imandar neta h……ap media walo ko jhuti baaten failane se parhej karna chahiye

Milind Rai के द्वारा
May 16, 2014

bade hi ghatiya kism k lekhak ho aap v.. abhi b khamba noch rhe ho.. jab electricty ya roads banti hain to jaati dekjh k nahi aatin.. sharam aani chahiye is post pe , is charitrahin lekhak ko.. yuvaon ko pathbhrast kah rhe o aap ? laanat hai aapki Secular soch pe ;)

    RK के द्वारा
    May 16, 2014

    Actually writer CONGRESS ka supporter hai. So bahut tension me hai.


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