blogid : 321 postid : 946

शास्त्री जी की मौत का रहस्य

  • SocialTwist Tell-a-Friend

कुछ मौतें ऐसी होती हैं जो तमाम उम्र रहस्य बनी रहती हैं. ऐसी ही मौत लालबहादुर शास्त्री जी ( Lal Bahadur Shastri ) की भी थी जो आज भी रहस्य बनी हुई है. लालबहादुर शास्त्री( Lal Bahadur Shastri ) भारत के दूसरे प्रधानमंत्री थे. लालबहादुर शास्त्री की सादगी ऐसी थी कि उन्हें देखने वाला व्यक्ति उनकी तरफ आकर्षित हो जाता था. लालबहादुर शास्त्री जी( Lal Bahadur Shastri ) का नाम भले ही इतिहास के पन्नों में नजर नहीं आता है पर यह वो नाम है जिसने जय जवान-जय किसान का नारा देकर देश के किसानों और सीमा पर तैनात जवानों का आत्मबल बढ़ाने की नई मिसाल कायम की थी.

Read:गुजराती शेर से डर गई हैं?


Lal Bahadur Shastri Death Mystery

लालबहादुर शास्त्री: क्या सुलझेगी मौत की गुत्थी ?

लालlal bahadur shastri and his wifeबहादुर शास्त्री की मौत (Lal Bahadur Shastri Death)को जब कई साल बीत चुके थे तब लालबहादुर शास्त्री ( Lal Bahadur Shastri ) के बेटे सुनील शास्त्री ने लालबहादुर शास्त्री के मौत के रहस्य (Lal Bahadur Shastri Death Secret)की गुत्थी सुलझाने को कहा था. पूर्व सोवियत संघ के ताशकंद में 11 जनवरी, 1966 को पाकिस्तान के साथ ताशकंद समझौते पर दस्तखत करने के बाद शास्त्री जी की मौत हो गई थी. लालबहादुर शास्त्री के बेटे सुनील शास्त्री का कहना था कि जब लालबहादुर शास्त्री की लाश को उन्होंने देखा था तो लालबहादुर शास्त्री की छाती, पेट और पीठ पर नीले निशान थे जिन्हें देखकर साफ लग रहा था कि उन्हें जहर दिया गया है. लालबहादुर शास्त्री की पत्नी ललिता शास्त्री का भी यही कहना था कि लालबहादुर शास्त्री की मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई थी.


लालबहादुर शास्त्री: स्वयं को जिम्मेदार तो नहीं मान रहे थे……..

लालबहादुर शास्त्री ( Lal Bahadur Shastri ) के बारे में कहा जाता है कि वे निणर्य लेने से पहले कई बार सोच-विचार करते थे इसलिए उनके अधिकांश निर्णय सही होते थे. पर कहते हैं कि लालबहादुर शास्त्री का ताशकंद समझौते ( Tashkent Agreement)पर हस्ताक्षर करना गलत निर्णय था और यही बात शास्त्री जी को महसूस होने लगी थी जिस कारण लालबहादुर शास्त्री ( Lal Bahadur Shastri ) ने अपने आप को हानि पहुंचाई थी या फिर वास्तव में लालबहादुर शास्त्री की मौत 11 जनवरी, 1966 को ह्रदयाघात के कारण हुई थी.


देश लालबहादुर शास्त्री जी ( Lal Bahadur Shastri ) के समय में काफी आर्थिक समस्याओं से घिरा हुआ था. ऐसा कहा जाता है कि लालबहादुर शास्त्री आर्थिक समस्याओं को सुलझा नहीं पा रहे थे जिस कारण वे काफी आलोचनाओं से घिर गए थे.


Read: Lal Bahadur Shastri Profile


Lal Bahadur Shastri Life

शास्त्री जी का जीवन और मां के साथ लगाव

भारत माता के लिए भी वो दिन खुशी का रहा होगा जब 2 अक्टूबर, 1904 को मुगलसराय, उत्तर प्रदेश में लालबहादुर शास्त्री( Lal Bahadur Shastri ) ने जन्म लिया होगा. लालबहादुर शास्त्री ( Lal Bahadur Shastri ) का का वास्तविक नाम लाल बहादुर श्रीवास्तव था. लालबहादुर शास्त्री बचपन से ही शिक्षा में कुशल थे जिस कारण स्नातकोत्तर की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उन्हें ‘शास्त्री’ की उपाधि से सम्मानित किया गया था. लालबहादुर शास्त्री ( Lal Bahadur Shastri ) भारत संघ से जुड़े थे जहां उन्होंने राजनीति को समझने की शुरुआत की थी.


बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जो अपने व्यस्त जीवन में भी मां की नरम-नरम हथेलियों से प्यार और दुलार लेना नहीं भूलते हैं. लालबहादुर शास्त्री ( Lal Bahadur Shastri ) पर उनके पुत्र सुनील शास्त्री द्वारा लिखी पुस्तक ‘‘लालबहादुर शास्त्री, मेरे बाबूजी’’ में बताया गया है कि शास्त्री जी की मां उनके कदमों की आहट से उनको पहचान लेती थीं और बड़े प्यार से धीमी आवाज में कहती थीं ‘‘नन्हें, तुम आ गये?”  लालबहादुर शास्त्री ( Lal Bahadur Shastri ) का लगाव अपनी मां के साथ इतना था कि वे दिन भर अपनी मां का चेहरा देखे बगैर नहीं रह सकते थे.



Lal Bahadur Shastri- Indian Prime Minister

लालबहादुर शास्त्री: विनम्र प्रधानमंत्री

lal bahadur shastriलालबहादुर शास्त्री ( Lal Bahadur Shastri ) कहा करते थे कि ‘हम चाहे रहें या न रहें, हमारा देश और तिंरगा झंडा रहना चाहिए’. लालबहादुर शास्त्री ( Lal Bahadur Shastri ) उन राजनेताओं में से एक थे जो अपने पद के दायित्व को भली प्रकार समझते थे. आजादी के बाद उत्तर प्रदेश में गोविंद वल्लभ पंत जब मुख्यमंत्री बने तो लाल बहादुर शास्त्री को उत्तर प्रदेश का गृहमंत्री बना दिया गया. नाटे कद व कोमल स्वभाव वाले शास्त्री को देखकर किसी को कल्पना भी नहीं थी कि वह कभी भारत के दूसरे सबसे सफल प्रधानमंत्री बनेंगे. एक समय ऐसा आया जब लालबहादुर शास्त्री को रेल मंत्री बनाया गया. लाल बहादुर शास्त्री ऐसे राजनेता थे जो अपनी गलती को सभी के सामने स्वीकार करते थे जिसके चलते लालबहादुर शास्त्री( Lal Bahadur Shastri ) ने रेल मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था.


लालबहादुर शास्त्री( Lal Bahadur Shastri ) को 1964 में देश का दूसरा प्रधानमंत्री बनाया गया था. 1966 में  उन्हें भारत का पहला मरणोपरांत भारत रत्न का पुरस्कार भी मिला था. लालबहादुर शास्त्री( Lal Bahadur Shastri ) को चाहने वाले लोगों को वो दिन आज भी याद आता है जब 1965 में अचानक पाकिस्तान ने भारत पर सायं 7.30 बजे हवाई हमला कर दिया था तो उस समय तीनों रक्षा अंगों के चीफ ने लालबहादुर शास्त्री से पूछा ‘सर आप क्या चाहते है आगे क्या किया जाए…आप हमें हुक्म दीजिए’ तो ऐसे में लालबहादुर शास्त्री ( Lal Bahadur Shastri ) ने कहा कि “आप देश की रक्षा कीजिए और मुझे बताइए कि हमें क्या करना है?” ऐसे प्रधानमंत्री बहुत कम ही होते हैं जो अपने पद को सर्वोच्च नहीं वल्कि अपने पद को जनता के लिए कार्यकारी मानकर चलते है. किसी ने सच ही कहा है कि वीर पुत्र को हर मां जन्म देना चाहती है. लालबहादुर शास्त्री ( Lal Bahadur Shastri ) उन्हीं वीर पुत्रों में से एक हैं जिन्हें आज भी भारत की माटी याद करती है.


Read:गठबंधनों के टूटने और बनने का संक्रमण काल

Please post your comments on: आपको क्या लगता है कि लालबहादुर शास्त्री की मौत कैसे हुई होगी ?


Tags: Lal Bahadur Shastri, Lal Bahadur Shastri Death, Lal Bahadur Shastri Death Mystery, Lal Bahadur Shastri Death Mystery in Hindi, Lal Bahadur Shastri Death Conspiracy, Lal Bahadur Shastri Death Secret, लालबहादुर शास्त्री, Lal Bahadur Shastri- Indian Prime Minister, Lal Bahadur Shastri Life, लालबहादुर शास्त्री मौत रहस्य,ताशकंद समझौता, Tashkent Agreement,Lal Bahadur Shastri Profile



Tags:                           

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (3 votes, average: 4.67 out of 5)
Loading ... Loading ...

377 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Destry के द्वारा
July 11, 2016

[…] de impuestos a los servicios de temneolunicacioecs (cable, internet y telefonía) así como un impuesto a las compras por internet procedentes del extranjero por debajo de los 200 […]

sukhmangal singh के द्वारा
June 23, 2016

“लालबहादुर शास्त्री- ताशकंद” शास्त्री जी ने पाकिस्तान -भारत युद्ध में जबरदस्त विजय के बाद ‘जय जवान ,जय किसान ‘का नारा दिया इसके पीछे लालबहादुर शास्त्री का मानना था की देश रक्षा के महत्तवपूर्ण कार्य में केवल जवान ही नहीं हमारे किसानों का कर्तव्य काम नहीं आका जा सकता है | उधर शांतिपूर्ण सम्बन्ध स्थापित हो इसी उद्देश्य से कि एक नया प्रस्ताव रखा जाय | रूस के वर्तमान प्रधान मंत्री कोसीगिन ने दिनों देशों को रूस के एक नगर ताशकंद में लालबहादुर शास्त्री ,भारत के प्रधान मंत्री और अय्यूब खां को आमंत्रित किया | वहां दोनों देशों के बीच आठ दिनतक लगातार विचार -विमर्श होता रहा | नतीजा इसका आया कि दोनों देशों में युद्ध समाप्त करने कि घोषणा कि गई | घोषणा के नौ घंटे ही बीते थे कि जनवरी ११,१९६६ को सदा -सदा के लिए दुनिया छोड़ चले गए | सारे संसार में शास्त्री जी की मृतु का समाचार बिजली गति से फैल गया | लोग कारण जानना चाहे तो यत्र-तत्र से ज्ञात होता था की उन्हें दिल का दौरा पड़ा था परन्तु इसे लोग मानने को राजी नही होते इन्हीं बातों को बड़े बुजुर्ग भी सहमत होते दिखे | शान्ति के महान दूत को अंतिम सलाम ताशकंद की धरती से रूस के प्रधानमंत्री श्री कोसीगिन और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अय्यूब खां ने अर्थी को कन्धा देकर विदा किया | रूस की जनता जो प्यार दिया था वह ही शव को बहती अश्रुधार से विदा किया | शव को दिल्ली लाया गया और उसे जनता के दर्शनार्थ रखा गया | देश -विदेश से आकर लोग शृद्धांजलि अर्पित करते | अंत में शव का दाहसंस्कार किया गया | उन्होंने हमें शान्ति -सद्भाव का सन्देश दिया कि ‘उसी साहस हिम्मत और एकता के साथ संघर्ष करना होगा हमने तो अपने आक्रमणकार्यों का मुकाबला किया था ‘ हम सभी भारत वासी उन्हें सलाम करते हैं |

Krishan kumar sharma के द्वारा
December 25, 2015

लाल बहादुर शास्त्री एक महान युग पुरुष थे उनको जबतक याद किया जायेगा जबतक ये संसार रहेगा में इस्वर से प्रार्थना करता हू की हमारे देस को ऐसे महान पुरुष समय समय पर मिले ताकि कोई उनको न भूल पाये ये हमरे देस का दुर्भग्य हे की हमारे यह देस द्रोहिओ की कमी नही हे जो अपनी राजनीति के लिए ऐसे महा पुरष की बलि चढ़ा देते हे

shailendra tiwari के द्वारा
March 25, 2014

mera man kahta hai ki itihas ko fir se pada jae aur shastri ji ki maut k rahasy ka pardapash kia jae…..bo hi ekmatra aise neta the jo har kaam karne k pahle jada se jada socha karte the yah khudkhushi ni sajish hai jo gopniy hai….shailendra tiwari

Haridas के द्वारा
December 11, 2013

शास्त्रीजी ऐसे पुरुष थे जो सोचसमझकर कोई निर्णय लेते थे तो उन्हें अपने गलतीपर अपसोस तो होगा मगर अपने शरीर पर खुद विष प्रयोग क्यों करते जो कि ओ अपनी गलतिया लोगो से छुपाते नहीं थे .और उनकी आत्महत्या नहीं वो हत्या ही थी इसमे कोई गुंजाईश नहीं………..

san के द्वारा
August 31, 2013

देश के अकेले ऐसे प्रधानमंत्री जो उन विषम परिस्थितियो में भी पाकिस्तान के सीमा में घुसने में नहीं हिचकिचाए…..वह समय जब किभारत अपने पेरो पर ठीक से खड़ा भी नहीं हो पाया था …..चीन से हाल ही में बुरी तरह हारा था और कटिन आर्थिक समय से गुजर रहा था…वोह प्रधानमंत्री गलत फैसला लेंगे जबकि वो ताशकंत इसी मुद्दे के लिए गए थे ….और गलत फैसले की गिलानी से स्वयं तो आघात पहुचाएगे…..यह बात कोरी बकवास है………कोई मूर्ख ही इस पर विश्वास करेगा…..

    TIN के द्वारा
    August 31, 2013

    हा एक ऐसा फैसला जो की वाजपेयी जी भी 1999 में नहीं ले पाए थे……जबकि तब भारत बहुत मजबूत  इसतिथि में था,,,

peeyush yadav के द्वारा
August 9, 2013

Bharat k sabse khuddar prime minister ab tak k Lalbhadur shastri the

ajaykumarsingh के द्वारा
October 3, 2012

ऐसे मजबूत एवं सच्चे लोगों को ऐसा हृदयाघात नहीं होता कि बस एक ही आघात में प्राण चले जाये। उनका सरल रहन सहन और अच्छा स्वास्थ ऐसी मृत्यु पर संदेह तो पैदा ही करते हैं। 

DR. PITAMBER THAKWANI के द्वारा
October 2, 2012

जब उन्होंने समझौते पर हस्ताक्षर कर ही दिए तो उन्हें जहर देने की बात गले नहीं उतरती! हाँ गलत निर्णय के आभास ने उन्हें बहुत ही विचलिता किया हो सकता है,अपनी अच्छी छवि के खराब होने के गम में उन्हें आघात हुआ होगा!


topic of the week



अन्य ब्लॉग

latest from jagran