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Chandrashekhar Azad – क्रांतिकारी योद्धा चंद्रशेखर आजाद

पोस्टेड ओन: 1 Dec, 2011 पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

chandrashekhar azadचंद्रशेखर आजाद का जीवन परिचय

काकोरी ट्रेन डकैती और साण्डर्स की हत्या में शामिल निर्भय क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद, का जन्म 23 जुलाई, 1906 को उन्नाव, उत्तर प्रदेश में हुआ था. चंद्रशेखर आजाद का वास्तविक नाम चंद्रशेखर सीताराम तिवारी था. चंद्रशेखर आजाद का प्रारंभिक जीवन आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र भावरा गांव में व्यतीत हुआ. भील बालकों के साथ रहते-रहते चंद्रशेखर आजाद ने बचपन में ही धनुष बाण चलाना सीख लिया था. चंद्रशेखर आजाद की माता जगरानी देवी उन्हें संस्कृत का विद्वान बनाना चाहती थीं. इसीलिए उन्हें संस्कृत सीखने लिए काशी विद्यापीठ, बनारस भेजा गया. दिसंबर 1921 में जब गांधी जी द्वारा असहयोग आंदोलन की शुरूआत की गई उस समय मात्र चौदह वर्ष की उम्र में चंद्रशेखर आजाद ने इस आंदोलन में भाग लिया जिसके परिणामस्वरूप उन्हें गिरफ्तार कर मजिस्ट्रेट के समक्ष उपस्थित किया गया. जब चंद्रशेखर से उनका नाम पूछा गया तो उन्होंने अपना नाम आजाद और पिता का नाम स्वतंत्रता बताया. यहीं से चंद्रशेखर सीताराम तिवारी का नाम चंद्रशेखर आजाद पड़ गया था. चंद्रशेखर को पंद्रह दिनों के कड़े कारावास की सजा प्रदान की गई.


क्रांतिकारी जीवन

1922 में गांधी जी द्वारा असहयोग आंदोलन को स्थगित कर दिया गया. इस घटना ने चंद्रशेखर आजाद को बहुत आहत किया. उन्होंने ठान लिया कि किसी भी तरह देश को स्वतंत्रता दिलवानी ही है. एक युवा क्रांतिकारी प्रनवेश चैटर्जी ने उन्हें हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन जैसे क्रांतिकारी दल के संस्थापक राम प्रसाद बिस्मिल से मिलवाया. आजाद इस दल और बिस्मिल के समान स्वतंत्रता और बिना किसी भेद-भाव के सभी को अधिकार जैसे विचारों से बहुत प्रभावित हुए. चंद्रशेखर आजाद के समर्पण और निष्ठा की पहचान करने के बाद बिस्मिल ने चंद्रशेखर आजाद को अपनी संस्था का सक्रिय सदस्य बना दिया. अंग्रेजी सरकार के धन की चोरी और डकैती जैसे कार्यों को अंजाम दे कर चंद्रशेखर आजाद अपने साथियों के साथ संस्था के लिए धन एकत्र करते थे. लाला लाजपत राय की हत्या का बदला लेने के लिए चंद्रशेखर आजाद ने अपने साथियों के साथ मिलकर सॉण्डर्स की हत्या भी की थी. आजाद का यह मानना था कि संघर्ष की राह में हिंसा होना कोई बड़ी बात नहीं है इसके विपरीत हिंसा बेहद जरूरी है. जलियांवाला बाग जैसे अमानवीय घटनाक्रम जिसमें हजारों निहत्थे और बेगुनाहों पर गोलियां बरसाई गईं, ने चंद्रशेखर आजाद को बहुत आहत किया जिसके बाद उन्होंने हिंसा को ही अपना मार्ग बना लिया.


झांसी में क्रांतिकारी गतिविधियां

चंद्रशेखर आजाद ने एक निर्धारित समय के लिए झांसी को अपना गढ़ बना लिया. झांसी से पंद्रह किलोमीटर दूर ओरछा के जंगलों में वह अपने साथियों के साथ निशानेबाजी किया करते थे. अचूक निशानेबाज होने के कारण चंद्रशेखर आजाद दूसरे क्रांतिकारियों को प्रशिक्षण देने के साथ-साथ पंडित हरिशंकर ब्रह्मचारी के छ्द्म नाम से बच्चों के अध्यापन का कार्य भी करते थे. वह धिमारपुर गांव में अपने इसी छद्म नाम से स्थानीय लोगों के बीच बहुत लोकप्रिय हो गए थे. झांसी में रहते हुए चंद्रशेखर आजाद ने गाड़ी चलानी भी सीख ली थी.


चंद्रशेखर आजाद और भगत सिंह

1925 में हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन की स्थापना की गई. 1925 में काकोरी कांड हुआ जिसके आरोप में अशफाक उल्ला खां, बिस्मिल समेत अन्य मुख्य क्रांतिकारियों को मौत की सजा सुनाई गई. जिसके बाद चंद्रशेखर ने इस संस्था का पुनर्गठन किया. भगवतीचरण वोहरा के संपर्क में आने के बाद चंद्रशेखर आजाद भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु के भी निकट आ गए थे. इसके बाद भगत सिंह के साथ मिलकर चंद्रशेखर आजाद ने अंग्रेजी हुकूमत को डराने और भारत से खदेड़ने का हर संभव प्रयास किया.


chandrashekhar azad deathचंद्रशेखर आजाद का निधन

1931 में फरवरी के अंतिम सप्ताह में जब आजाद गणेश शंकर विद्यार्थी से मिलने सीतापुर जेल गए तो विद्यार्थी ने उन्हें इलाहाबाद जाकर जवाहर लाल नेहरू से मिलने को कहा. चंद्रशेखर आजाद जब नेहरू से मिलने आनंद भवन गए तो उन्होंने चंद्रशेखर की बात सुनने से भी इंकार कर दिया. गुस्से में वहां से निकलकर चंद्रशेखर आजाद अपने साथी सुखदेव राज के साथ एल्फ्रेड पार्क चले गए. वे सुखदेव के साथ आगामी योजनाओं के विषय में बात ही कर रहे थे कि पुलिस ने उन्हे घेर लिया. लेकिन उन्होंने बिना सोचे अपने जेब से पिस्तौल निकालकर गोलियां दागनी शुरू कर दी. दोनों ओर से गोलीबारी हुई. लेकिन जब चंद्रशेखर के पास मात्र एक ही गोली शेष रह गई तो उन्हें पुलिस का सामना करना मुश्किल लगा. चंद्रशेखर आजाद ने पहले ही यह प्रण किया था कि वह कभी भी जिंदा पुलिस के हाथ नहीं आएंगे. इसी प्रण को निभाते हुए उन्होंने वह बची हुई गोली खुद को मार ली.


पुलिस के अंदर चंद्रशेखर आजाद का भय इतना था कि किसी को भी उनके मृत शरीर के के पास जाने तक की हिम्मत नहीं थी. उनके शरीर पर गोली चला और पूरी तरह आश्वस्त होने के बाद ही चंद्रशेखर की मृत्यु की पुष्टि हुई.


बाद में स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात जिस पार्क में उनका निधन हुआ था उसका नाम परिवर्तित कर चंद्रशेखर आजाद पार्क और मध्य प्रदेश के जिस गांव में वह रहे थे उसका धिमारपुरा नाम बदलकर आजादपुरा रखा गया.




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26 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Rajkumar soni के द्वारा
June 30, 2014

आप को शत शत नमन ,यह राष्ट्र आप जैसे पुत्र को पा के सर्वदा ऋणी है ,जय हिन्द .वन्दे मातरंम् ,

shesh narayan mishra के द्वारा
June 25, 2014

aap ke jase mahaan krantikari desh me virle he hote hai jaise aap thi chandra sekhar azad ji aap ko ye aap ka desh naman karta hai aap unnao ke mahaan saraat hai

Prashant J Surve के द्वारा
May 27, 2014

I proud to our soldiers and i proud to be an indian

chander shekhar के द्वारा
April 30, 2014

india me esa pm hona chahiy

monu के द्वारा
April 2, 2014

unhi ki badolat aaj hm azad india me sanse le rhe hain hai hind hai bharat.

raja ji के द्वारा
March 12, 2014

Unki muccho m itna DM tha ki angrejo ptlun gili ho jati thi

jainandan kumar के द्वारा
March 7, 2014

इंडियन Tiger

gopal के द्वारा
March 6, 2014

हमारे इन वीरो को हमारा सत- सत नमन |

Chintoo के द्वारा
February 10, 2014

I like this website to much.It provides very nice information about freedom fighters. Thank you jagranjunction.

rahul ranjan के द्वारा
January 22, 2014

muje to bauat accha lga muje iski aj sakt jarurt thi islai thnks to all evy budy

volcano in the making के द्वारा
January 1, 2014

Bharat maa ka asli lal 

harshal patil के द्वारा
December 11, 2013

marathi

somnath arjun के द्वारा
October 8, 2013

हिदुस्थान तुझे सलाम

Azad के द्वारा
September 21, 2013

Dushman ki goliyon ka hum samna karenge, Azad hee rahein hain, azad hee rahenge’ See more at: http://techiesglobe.blogspot.in/2013/09/chandra-shekhar-azad.html

Jai के द्वारा
July 23, 2013

काकोरी ट्रेन ____ और साण्डर्स की ___

    harshal patil के द्वारा
    December 11, 2013

    मराठी

krishna gopal के द्वारा
June 30, 2013

please don’t sart the article of this great freedom fighter with dacoity and murder because these things was the part of that fight. and he was not a professional dacoit and murderer………… first line of this article is written without any sense………..

jayant के द्वारा
June 13, 2013

awesome

saumya के द्वारा
May 12, 2013

i feel glad and glorious while i read this beautiful article.

PRASHANT TIWARI के द्वारा
April 25, 2013

जय हिन्द देश के इस महान क्रन्तिकारी को मेरा सतसत नमन आप हमारे दिलों में है और हमेसा रहेंगे भारत माता के इस सपूत को सरे उन्नाव निवासियों की तरफ से सतसत नमन जय हिन्द जय भारत

PRASHANT TIWARI के द्वारा
April 25, 2013

चन्द्र शेखर सीताराम तिवारी उर्फ़ उन्नाव का बब्बर शेर

PRASHANT TIWARI के द्वारा
April 25, 2013

JAY HIND JAY BHARAT BHARAT MATA KI SACHCHI SANTAN

PRASHANT TIWARI के द्वारा
April 25, 2013

जय हिन्द देश के इस महान क्रन्तिकारी को सतसत नमन चन्द्रसेखर सीताराम तिवारी इक ऐसा नाम जो हम हिंदुस्तानीयों के लिए प्रेरणा है देश हित के कुछ भी कर गुजरे की बिना जान की प्रवाह किये जय हिन्द जय भारत

Vikas Saklani के द्वारा
September 26, 2012

जय हिंद जय भारत

ajay के द्वारा
December 1, 2011

चंद्रशेखर आजाद का नाम ही अंग्रेजी हुकुमत के लिए खतरे की घंटी थी. कई बड़े-बड़े क्रांतिकारियों उन्हें आर्दश मानते थे. जिसमे भगत सिंह भी थे.

    saurabh के द्वारा
    March 7, 2013

    jai hind dada




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