Best Web Blogs    English News

facebook connectrss-feed

Political Blog

राजनीतिक नेताओं के व्यक्तित्व-कृतीत्व सहित उनकी उपलब्धियों को दर्शाता ब्लॉग

481 Posts

451 comments

| NEXT

Dr.Rajendra Prasad- स्वतंत्र भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ.राजेन्द्र प्रसाद

Posted On: 28 Jul, 2011 पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Dr. Rajendra prasadजीवन-परिचय

26 जनवरी, 1950 को जब भारत को संविधान के रूप में एक गणतंत्र राष्ट्र का दर्जा दिया गया उसी दिन डॉ. राजेन्द्र प्रसाद के रूप में स्वतंत्र भारत को पहला राष्ट्रपति भी प्राप्त हुआ. राजेन्द्र प्रसाद का जन्म 3 दिसंबर, 1884 को बिहार के एक छोटे से गांव जीरादेई में हुआ था. यह वो समय था जब धर्म के नाम पर भेदभाव जैसी व्यवस्थाएं समाज से पूरी तरह विलुप्त थीं. राजेंद्र जी के भी कई सारे मित्र मुसलमान थे जो उनके साथ मिलकर होली खेलते थे और हिन्दू मुहर्रम वाले दिन ताजिए निकालते थे. एक बड़े संयुक्त परिवार के सबसे छोटे सदस्य होने के कारण इनका बचपन बहुत प्यार और दुलार से बीता. संयुक्त परिवार होने के कारण पारिवारिक सदस्यों के आपसी संबंध बेहद मधुर और गहरे थे. इनके पिता का नाम महादेव सहाय था. डॉ राजेंद्र प्रसाद की प्रारंभिक शिक्षा उन्हीं के गांव जीरादेई में हुई. उस समय यह रिवाज था कि शिक्षा का आरंभ फारसी भाषा से ही किया जाएगा. इसीलिए राजेंद्र प्रसाद और उनके चचेरे भाइयों को पढ़ाने एक मौलवी आते थे. पढ़ाई की तरफ इनका रुझान बचपन से ही था. बाल-विवाह की परंपरा का अनुसरण करते हुए मात्र 12 वर्ष की आयु में इनका विवाह राजवंशी देवी से संपन्न हुआ. राजेंद्र प्रसाद ने अपने लगातार खराब रहने वाले स्वास्थ्य क असर अपनी पढ़ाई पर नहीं पड़ने दिया. आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने कलकत्ता विश्विद्यालय की प्रवेश परीक्षा में पहला स्थान प्राप्त किया. उन्हें 30 रूपए महीने की छात्रवृत्ति भी प्रदान की गई. जीरादेई गांव से पहली बार किसी युवक ने कलकत्ता विश्विद्यालय में प्रवेश पाने में सफलता प्राप्त की थी जो निश्चित ही राजेंद्र प्रसाद और उनके परिवार के लिए गर्व की बात थी. सन 1902 में उन्होंने कलकत्ता प्रेसिडेंसी कॉलेज में प्रवेश लिया. सन 1915 में कानून में मास्टर की डिग्री में विशिष्टता पाने के लिए राजेन्द्र प्रसाद को सोने का मेडल मिला. इसके बाद उन्होंने कानून में डॉक्टरेट की उपाधि भी प्राप्त की.


डॉ. राजेंद्र प्रसाद का व्यक्तित्व

डॉ. राजेन्द्र प्रसाद का जन्म उस काल में हुआ जब ब्रिटिश साम्राज्यवाद पूरी तरह अपने पांव पसार चुका था. खाने-पीने, कपड़े पहनने से लेकर लगभग हर क्षेत्र में ब्रिटिश छाप महसूस की जा सकती थी. लेकिन राजेंद्र प्रसाद परंपरा के अनुसार हमेशा धोती-कुर्ता और सर पर टोपी पहनते थे. वह एक विद्वान और प्रतिभाशाली पुरुष थे. संयुक्त परिवार में सबसे छोटे होने के कारण राजेंद्र प्रसाद का बचपन बहुत दुलार से बीता था. वह एक दृढ़ निश्चयी और उदार दृष्टिकोण वाले व्यक्ति थे. कायस्थ परिवार से संबंधित होने के कारण राजेंद्र प्रसाद थोड़े रूढिवादी विचारधारा वाले थे. उन्होंने स्वयं स्वीकार किया था कि वह ब्राह्मण के अलावा किसी और का छुआ भोजन तक नहीं खाते थे. उन्होंने अपना यह व्यवहार गांधी जी के संपर्क में आने के बाद छोड़ा था.


Dr. Rajendra prasadडॉ राजेन्द्र प्रसाद का राजनैतिक सफर

डॉ राजेन्द्र प्रसाद का राजनैतिक सफर स्वदेशी आंदोलन के साथ तभी शुरू हो गया था जब उन्होंने गांधी जी से प्रेरित हो विदेशी कपड़ों की आहुति दे दी थी. गोपाल कृष्ण गोखले ने 1905 में सर्वेंट्स ऑफ इण्डिया सोसायटी की शुरुआत की तब राजेंद्र प्रसाद को इसमें सदस्यता लेने के लिए बहुत प्रेरित किया. लेकिन परिवारवालों की इच्छा के विरुद्ध वह कोई भी कदम उठाना नहीं चाहते थे इसलिए उनका प्रस्ताव ठुकरा दिया. इस बीच कानून की डिग्री प्राप्त करने के बाद राजेन्द्र प्रसाद कई प्रसिद्ध वक़ीलों, विद्वानों और लेखकों से मिले. अब तक वह भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य भी बन गए थे. एक समर्पित कार्यकर्ता की छवि के चलते वह जल्द ही गांधी जी के संपर्क में आ गए थे. यही उनके राजनैतिक जीवन की एक सुनहरी शुरुआत थी. चम्पारन आंदोलन के दौरान राजेन्द्र प्रसाद गांधी जी के वफादार साथी बन गए थे. गांधी जी के प्रभाव में आने के बाद उन्होंने अपने पुराने और रूढिवादी विचारधारा का त्याग कर दिया और एक नई ऊर्जा के साथ स्वतंत्रता आंदोलन में अपनी भागीदारी सुनिश्चित की. राजेन्द्र प्रसाद राष्ट्रीय कॉग्रेस से एक से अधिक बार अध्यक्ष भी रहे. भले ही 15 अगस्त, 1947 को भारत को स्वतंत्रता प्राप्त हुई लेकिन संविधान सभा का गठन उससे कुछ समय पहले ही कर लिया गया था. जिसके अध्यक्ष डॉ राजेन्द्र प्रसाद थे. 26 जनवरी, 1950 को भारत गणतंत्र बना और देश को अपना पहला राष्ट्रपति मिल गया.

Dr. Rajendra Prasad Profile in Hindi – अगर डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ना बनते राष्ट्रपति?


राजेंद्र प्रसाद की विशिष्ट उपलब्धियां

  • डॉ राजेन्द्र प्रसाद भारत के एकमात्र राष्ट्रपति थे, जिन्होंने लगातार दो बार राष्ट्रपति का पद प्राप्त किया.
  • राष्ट्रपति के पद पर रहते हुए राजेन्द्र प्रसाद ने सद्भावना के उद्देश्य से कई देशों की यात्राएं भी कीं. उन्होंने इस आण्विक युग में शांति बनाए रखने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया.

राजेंद्र प्रसाद को दिए गए सम्मान

सन 1962 में अपने राजनैतिक और सामाजिक योगदान के लिए उन्हें भारत के सर्वश्रेष्ठ नागरिक सम्मान “भारत रत्न” से नवाजा गया.


राजेन्द्र प्रसाद का निधन

राजनीति से सन्यास लेने के बाद राजेन्द्र प्रसाद ने अपना जीवन पटना के निकट एक आश्रम में बिताया जहां 28 फरवरी, 1963 को उनका निधन हो गया.


राजेन्द्र प्रसाद मौलिक रूप से एक सादगी पसंद राष्ट्रपति थे. बचपन में भी जब उनके साथी विदेशी संस्कृति से प्रभावित हो पैंट-शर्ट पहनने लगे थे, उस समय भी राजेन्द्र प्रसाद केवल धोती-कुर्ता पहनने में ही खुद को सहज महसूस करते थे. उनके जीवन से जुड़ी कई ऐसी घटनाएं है जो यह प्रमाणित करती हैं कि राजेन्द्र प्रसाद बेहद दयालु और निर्मल स्वभाव के थे. भारतीय राजनैतिक इतिहास में उनकी छवि एक महान और विनम्र राष्ट्रपति की है. अपने निधन के इतने वर्षों बाद भी वे समस्त राजनेताओं के बीच एक आदर्श के रूप में याद किए जाते हैं.

Indian President Dr. Rajendra Prasad: बिहार के गांधी को नमन

सादगी और महानता का सम्मिलन – डॉक्टर राजेन्द्र प्रसाद

अब केवल ‘राजमाता’ ही इनका उद्धार कर सकती हैं



Tags:                                     

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (46 votes, average: 4.37 out of 5)
Loading ... Loading ...

3 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Similar articles :
‘टीचर डे' स्पेशल: मिलिए उन शिक्षकों से जिन्होंने दुनिया के इन महान लोगों को बनाया

अपने प्यार के लिए ये सब करना पड़ा इन राजाओं को – जानिए भारतीय इतिहास की 9 प्रेम कहानियां

खूबसूरती बनी अभिशाप, किसी एक की न होकर बनी पूरे नगर की वधु

इन घरों में छप्पर फाड़ कर बरसा है पद्म पुरस्कार

सिर्फ ललित नारायण मिश्रा ही नहीं बल्कि इन भारतीय राजनेताओं को भी मिली है दर्दनाक मौत... जिसे सुन आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे

This is Bharat and not 'Hindustan'

पूरी दुनिया को अहिंसा का संदेश देने वाले गांधी को नामांकन के बाद क्यों नहीं मिला नोबेल

माता ने ही अपनी मूर्ति दी, खुद ही इंजीनियर हायर किया और बनवाया अपना मंदिर. कलियुग में माता के चमत्कार की एक अविश्वसनीय कहानी

गांधी के साथ हिटलर ने दिलवाई थी भारत को आजादी !!!

जब गांधी को करना पड़ा अपने उसूलों से समझौता

| NEXT

Post a Comment

*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

seo के द्वारा
December 2, 2015

Hello Web Admin, I noticed that your On-Page SEO is is missing a few factors, for one you do not use all three H tags in your post, also I notice that you are not using bold or italics properly in your SEO optimization. On-Page SEO means more now than ever since the new Google update: Panda. No longer are backlinks and simply pinging or sending out a RSS feed the key to getting Google PageRank or Alexa Rankings, You now NEED On-Page SEO. So what is good On-Page SEO?First your keyword must appear in the title.Then it must appear in the URL.You have to optimize your keyword and make sure that it has a nice keyword density of 3-5% in your article with relevant LSI (Latent Semantic Indexing). Then you should spread all H1,H2,H3 tags in your article.Your Keyword should appear in your first paragraph and in the last sentence of the page. You should have relevant usage of Bold and italics of your keyword.There should be one internal link to a page on your blog and you should have one image with an alt tag that has your keyword….wait there’s even more Now what if i told you there was a simple Wordpress plugin that does all the On-Page SEO, and automatically for you? That’s right AUTOMATICALLY, just watch this 4minute video for more information at. Seo Plugin seo http://www.SeoOptimizedRankings.com/

Ravish kumar के द्वारा
September 4, 2014

C

Tushar Kant Srivastava के द्वारा
January 3, 2014

BBAAAAAAADDDDDEST




अन्य ब्लॉग

  • ज्यादा चर्चित
  • ज्यादा पठित
  • अधि मूल्यित