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राजनीतिक नेताओं के व्यक्तित्व-कृतीत्व सहित उनकी उपलब्धियों को दर्शाता ब्लॉग

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"लालबहादुर शास्त्री- ताशकंद" शास्त्री जी ने पाकिस्तान -भारत युद्ध में जबरदस्त विजय के बाद 'जय जवान ,जय किसान 'का नारा दिया इसके पीछे लालबहादुर शास्त्री का मानना था की देश रक्षा के महत्तवपूर्ण कार्य में केवल जवान ही नहीं हमारे किसानों का कर्तव्य काम नहीं आका जा सकता है | उधर शांतिपूर्ण सम्बन्ध स्थापित हो इसी उद्देश्य से कि एक नया प्रस्ताव रखा जाय | रूस के वर्तमान प्रधान मंत्री कोसीगिन ने दिनों देशों को रूस के एक नगर ताशकंद में लालबहादुर शास्त्री ,भारत के प्रधान मंत्री और अय्यूब खां को आमंत्रित किया | वहां दोनों देशों के बीच आठ दिनतक लगातार विचार -विमर्श होता रहा | नतीजा इसका आया कि दोनों देशों में युद्ध समाप्त करने कि घोषणा कि गई | घोषणा के नौ घंटे ही बीते थे कि जनवरी ११,१९६६ को सदा -सदा के लिए दुनिया छोड़ चले गए | सारे संसार में शास्त्री जी की मृतु का समाचार बिजली गति से फैल गया | लोग कारण जानना चाहे तो यत्र-तत्र से ज्ञात होता था की उन्हें दिल का दौरा पड़ा था परन्तु इसे लोग मानने को राजी नही होते इन्हीं बातों को बड़े बुजुर्ग भी सहमत होते दिखे | शान्ति के महान दूत को अंतिम सलाम ताशकंद की धरती से रूस के प्रधानमंत्री श्री कोसीगिन और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अय्यूब खां ने अर्थी को कन्धा देकर विदा किया | रूस की जनता जो प्यार दिया था वह ही शव को बहती अश्रुधार से विदा किया | शव को दिल्ली लाया गया और उसे जनता के दर्शनार्थ रखा गया | देश -विदेश से आकर लोग शृद्धांजलि अर्पित करते | अंत में शव का दाहसंस्कार किया गया | उन्होंने हमें शान्ति -सद्भाव का सन्देश दिया कि 'उसी साहस हिम्मत और एकता के साथ संघर्ष करना होगा हमने तो अपने आक्रमणकार्यों का मुकाबला किया था ' हम सभी भारत वासी उन्हें सलाम करते हैं |

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सत्य क्या है . गुजरात दंगा क्यों हुआ . हिंदुओं को एक ट्रेन की बोगी में ज़िंदा क्या जला देना कानूनी रूप से ठीक था . अगर हिंदुओं के गुस्से के कारण मुसलमानों के वजह बेवजह , कहीं कहीं बिना कहीं कसूर के, निरीह मुसलमानों को, मारा गया अनुचित होते हुए भी क्या यह गुस्सा गलत था . ऐसे ही मर जाने देना था हिंदुओं को और एक आह भी नहीं निकालनी थी , यही चाह रहे थे ये कानग्रेसिये . क्या उस दिन नरेंद्र मोदी गुजरात के सी.एम्. नहीं रहते और कांग्रेस पार्टी का ही राज रहता और ऐसा हो जाता तो क्या कांग्रेस का सी.एम्. इस घटना को रोक लेता . मोदीजी का दोष इतना ही था की उस दिन वो ही सी.एम् थे . क्या मोदीजी  गुजरात में सभी मुसलमानों को इस प्रदेश से बाहर कर दिए . नहीं , बल्कि मुसलमानों की जो स्थिति थी गुजरात में उससे मोदी जी के राज में पहले से बेहतर स्थिति में वहाँ के मुसलमान हैं . रह गया की सिक्का चलाना है ओपोसिसन द्वारा मोदीजी के विरुद्ध में . यह सिक्का फेल कर गया कांग्रेसियों का .दूसरा सिक्का गढा गया , भूमि अधिग्रहण बिल को तोड़ मरोड़ कर झूठी बातें और अफवाह फैलाई जा रही है युवराज जी को इसका ठेका भी कांग्रेसियों ने दे दिया है , तीसरा सिक्का मध्यम वर्गीय समाज को एक फिर बड़ा झूठ परोसा जा रहा है , और किसी के द्वारा नहीं , बल्कि युवराज जी ही द्वारा . कांग्रेसियों मे मन में एक ही बात है , यह भारत , ये भारतीय ,भारत की खदाने, भारत की कन्याकुमारी समुद्र तट की बालू जिसमें थोरियम ऑक्साइड है , भारत की अत्यंत दुर्लभ मूर्तियां , भारत का खजाना , भारत का सोना, हीरा , जवाहरात सब इनके पिताजी लोंगों का है , देख नहीं पा रहे हैं इतने खजाने पर इतने सम्पतियों पर मोदीजी का एज ए कस्टोडियन बनना .रोज के हिसाब से एक न एक झूठ , मनगढंत किस्सा लेकर चले आते हैं टी.वि. के सामने और बे फ़िक्र परोस रहे हैं सफ़ेद झूठ .

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अमरिका हर बात में सिर्फ अपना हित देखता है उसे दूसरे देशों के हितों से कोइ लेना देना नहीं है वह लादेन को मार देने के लिए पाकिस्तान में अंदर तक घुस गया पर किसी नें उसे बुरा नहीं कहा मगर यदि भारत अभी अपने गुनाहगारों को मारने के लिए पाकिस्तान में घुस जाये तो हायतोबा मचाने वालों में सबसे आगे खडा होगा ।आज अमरिका चीन को नहीं डरा सकता क्योंकि उस मालूम है की चीन उसे तगडी टक्कर देगा बल्की वह खुद चीन से डरता है लेकिन भारत के मामले में उसे पता है कि भारत सिर्फ चिल्लाता रहेगा करेगा कुछ भी नहीं।दोस्ती बराबर वालों से होती है कमजोरों से नहीं सच ही कहा है कि भय के बिना प्रीती नहीं होती

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त्याग करने वालों को ऐय्याशीनहीं माना जा सकता है। ऐय्याशी मानवात्माएँ दूसरे निर्दोष मानवात्माओं के मानवाधिकारों को छीनतीं हैं। भारतीय संविधान की मूल प्रस्तावना (उदेश्यिका) मेरे समझ से मानवाधिकारों की शतप्रतिशत रक्षक है। परन्तु भारतीय या विश्व का कोई भी राजनेता मानवाधिकारों की चतुर्दिक रक्षा करने में समर्थ सर्वकल्याणकारी रोडमैप प्रदान नहीं किया। बल्कि सभी ने आजतक मानवाधिकारों को लूटने वाली नीतियों को ही अपनाया है। केवल धनोत्पादक (किसानों, कृषिमजदूरों, गैरकृषिमजदूरों तथा इन तीनों के बौद्धिक वंशों को) वर्गों को लूट -लूट कर ही सम्पूर्ण विष्व का तथा भारत का भी विकास हो रहा है। फलस्वरूप ही मानवनिर्मित सम्पूर्ण प्रकार की भौतिक समस्याएँ उत्पन्न हुयीं हैं। जो विष्व को तथा भारत को महाविनाश की ओर ही अग्रसर कर रहीं हैं। इसी लिए मैं आजतक किसी राजनेता को अपना आदर्श बनने के योग्य नहीं माना।

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भारत को आजदी गाँधी जी ने नहीं सुबास चन्द्र बोस ने दिलवाई थी. उन्होंने सेना में मौजूद भारतियों के मन को उद्देलित कर दिया था, इसी कारण ब्रिटिश सरकार ने आजाद हिन्द सैनिको कि फाँसी कि सजा को माफ़ कर दिया था . लेकिन अंततः यह आक्रोश सुलगता रहा और रॉयल इंडियन नेवी के भारतीय सैनिकों ने 18 फरवरी 1946 को एचआईएमएस तलवार नाम के जहाज से मुम्बई में अंग्रेजी सरकार के विरूद्ध मुक्ति संग्राम का उद्घोष कर दिया। नौसैनिकों का यह मुक्ति संग्राम इतना तीव्र था कि शीघ्र ही यह मुम्बई से चेन्नई, कोलकात्ता , रंगून और कराँची तक फैल गया। महानगर , नगर और गाँवों में अंग्रेज अधिकारियों पर आक्रमण किये जाने लगे तथा कुछ अंग्रेज अधिकारियों को मार दिया गया। उनके घरों पर धावा बोला गया तथा धर्मान्तरण व राष्ट्रीय एकता विखण्डित करने के केन्द्र बने उनके पूजा स्थलों को नष्ट किये जाने लगा । स्थान - स्थान पर मुक्ति सैनिकों की अंग्रेज सैनिकों के साथ मुठभेड होने लगी। उनलोगों का विद्रोह तो दबा दिया गया.       लेकिन गाँधी जी ने क्या किया?, उन्होंने उन सैनिको कि निंदा कर डाली. लगभग सभी बड़े नेताओ ने उनकी निंदा किया. लेकिन अंग्रेज फिर भी बहुत घबरा गए. उनलोग लग गया था कि जिस प्रकार का असंतोष भारतीय सेना में पनप रहा 1857 का इतिहास दुबारा दोहरा सकता है. तब तो अंग्रेजो को अपने देश भागने का भी मौका नहीं मिलेगा. अंग्रेजों को ज्ञात हो गया कि केवल गोरे सैनिको के भरोसे भारत पर राज नहीं किया किया जा सकता. तत्कालीन ब्रिटिस हाई कमिश्नर जॉन फ्रोमैन का मत था कि 1946 में रॉयल इंडियन नेवी के विद्रोह ( मुक्ति संग्राम ) के पश्चात भारत की स्वतंत्रता सुनिश्चित हो गई थी । 1947 में ब्रिटिस प्रधानमंत्री लार्ड एटली ने भारत की स्वतंत्रता विधेयक पर चर्चा के दौरान टोरी दल के आलोचकों को उत्तर देते हुए हाउस ऑफ कॉमन्स में कहा था कि- 'हमने भारत को इसलिए छोडा, क्योंकि हम भारत में ज्वालामुखी के मुहाने पर बैठे थे' (दि महात्मा एण्ड नेता जी , पृष्ठ -125 , लेखक - प्रोफेसर समर गुहा )     लेकिन भारतियों सैनिको में आजादी का जोस भरने वाले आजाद हिन्द सैनिको को क्या मिला. उनको आजादी के बाद आतंकवादी का तमगा पहना दिया गया. जब डॉ श्यामा प्रशाद मुखर्जी ने नेहरु से आजाद हिंद फ़ौज के पूर्व सैनिको को भारतीय सेना के मानदंड पर पेंशन और भारतीय सेना अपने सैनिको को रिटायर के बाद जो सुविधा देती है वो सब देने का प्रस्ताव रखा था, तो नेहरु ने कहा की "मै आजाद हिंद फ़ौज को मान्यता नही देता , ये एक आतंकवादी कृत्य था . मै किसी निजी सेना बनाने के खिलाफ हूँ भले ही उसका इस्तेमाल देश के लिए हो, इसलिए मै ऐसे किसी भी प्रस्ताव को स्वीकार नही करूँगा |" ये संसद के रिकार्ड मे है।

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एक पत्र- माननीय मोदीजी को....24 अप्रैल,2014 गरमागरम चुनावी माहौल और मई महीनेकी कडी धूपकी गरमीमें जनताका दिमाग  चकरा जानेकी कगार पर है . वर्तमान सोनियाकी रिमोट सरकारसे हर भारतवासी काफी त्रस्त है . ऐसेमें समूचे राष्ट्रकी नजरें आपपर टिकी हुई हैं क्यूँकि आप ने गुजरात में अपनाई हुई कार्यशैली, सुशासन,विकास,जनकल्याणकी नई  सोच, बढिया इन्फ्रास्ट्रक्चर, बीआरटीएस, विदेशीपूँजी निवेश और टूरिझमको बढावा,   नैनोको स्थापित करना, नवरात्री जैसे जगविख्यात उत्सवोंका  जनसामान्यके लिए निःशू्ल्क आयोजन, प्रशंसनीय नारीसुरक्षाके उपाय, शहरके हर क्षेत्रमें जोगिंग पार्क, कांकरिया के आसपास एम्युजमेन्ट पार्क, साबरमतीरिवरफ्रन्ट, वाईब्रन्ट समीट और जनवरीका पतंगोत्सव एवम् कच्छ रनोत्सव   इत्यादि अपने आपमें एक मिसाल बन चूके हैं इसमें कोई दोराय नहीं हो सकती. ये सभी कार्य आपके  शिरके मुकुटमें मोरपींच्छकी तरह हमेशा चमकते रहेंगे. इन्हें देखकर,  जानकर ही तो सब देशवासीयोके मनमें , आपके रूपमें एक अच्छा  शासक और विकासपुरुष,  नजर आने लगा है. यही कारन है कि आपकी जनसभा में इतनी भारी भीड अपने आप उमड पडती है. स्थल  चाहे कोई भी हो, समय  चाहे कोई भी हो . आपके भाषणोमें, टीवी इन्टरव्यूमें बाकी सारे मुद्दोंका उल्लेख होता है, किन्तु कुछ जनहितकी बातें छूट गइ दिखती है जो मैं इस  पत्रके माध्यमसे आपके समक्ष रखना  चाहता हूँ.........   1)  सियासतमें प्रवेशके लिए मीनीमम योग्यता ग्रेजुएशन कर दी जाय.   2)  सियासतसे 4 टर्मके ( 20 साल) बाद कमपल्सरी निवृत्ती दे दी जाय.   3)  MLA , MP, RETIRED MINISTER,PRESIDENT आदिके पगार,       भत्ते, मुफ्त गाडी-फोन-बंगला-अेसी-हवाइसफर-नौकरचाकर-सुरक्षातैनाती       और पैन्शन वगैरह में काफी कटौती की जाय, ताकि गरीबका पैसा बच       सके.   4)  रेल्वेके कई स्टेशनो पर ईर्द-गिर्द करोडो टन लोहा पटरियों,स्लीपर्सके        रूपमें अनयूज्ड पडा हुआ मैंने अपनी आँखोंसे देखा है. क्या इसका       रिकार्ड रेल दफ्तरमें कहीं दर्ज हैं . बिलकुल नहीं होगा ये मेरा दावा       है. ये सारा लोहा पूरे देशके स्टेशनोंसे इकठ्ठा किया जाय और इसे       भठ्ठीमें गलाकर, कइ डिब्बें व इन्जिन बनाये जा सकतें हैं . रेल्वे       पैसेन्जर किराया घटाएगी तो भी मुनाफा करेगी. जनता वाहवाही        करेगी सो अलग.    5) एक गरीब परिवारका देहाती लडका पढाईमें तेजस्वी होनेके बावजूद      आईआईएम अहमदाबाद में दाखिला कैसे पाए बेचारा, क्यूँकि वह      कोर्ष ही इतना महँगा है कि गाँवका खेत बेचकर भी वह लडका      फीस नहीं भर सकता. बैन्कवाले लोनके सामने किमती चीजको      गीरो रखनेकी माँग कर रहे हैं . आझादीके 67 सालके बाद भी      इच्छित शिक्षा पाना संभव नहीं हो पाया है. आप कुछ करें ऐसी      प्रार्थना है.   6)  भारत ही एक ऐसा देश है जहाँ जनताके आरोग्यकी सत्तामें बैठी सरकार      जरा भी दरकार नहीं करती. दवाई, लैब-टेस्ट, डोकटर, ओपरेशन, ओक्सिजन,      डायलिसीस, बोडी-चैकअप,हार्ट-ट्रीटमेन्ट, कैन्सर-ट्रीटमेन्ट, डायाबिटीक उपचार       और महिला-प्रसूति आदिमें किसी रेग्युलेटरी बोडीका कोई कन्ट्रोल या सुपरविजन      नहीं है. सभी लोग जनताको जैसी मरजी हो, लूंट रहे हैं. क्या इनके चारजिस      एवम् फीस को पूरे देशमें स्टान्डर्डडाइज नहीं िकिया जा सकता ? ये सोचनेकी      नितांत आवश्यकता है. किसी गरीबके पास इलाजके लिए पैसे न हो तो उसके      पास केवल दो ही रास्ते बचते है- या तो वो किसीके  भीख माँगे या तो वो अपने  आप्तजनको नजरके सामने बेबस मरता देखे. कल्पना किजीए      स्वतंत्रताके छह दशकके बाद गरीबकी ऐसी बदतर हालतका     जिम्मेदार किसको ठहराना चाहिए. आप कुछ करिएगा.  7)  सियासतमें मूर्ख,धूत और लफंगोको आने से रोकनेके लिय़े उनका      एन्ट्रन्स टेस्ट कम्पलसरी कर देना चाहिए जिसमें उसके सामान्य ज्ञान, भूगोलीय      जानकारी, ऐतिहासिक तवारीख और देशकी आर्थिक स्थितिका एवम्      उसकी प्रामाणिकता और सेवाभावनाका जायजा लिया जा सके.  एन्ट्रन्स टेस्टमें 60% से      कम मार्क्स लानेवाला घर वापस जाय. अगर ये व्यवस्था की जाय तो बहुत हदतक अनचाहे       तत्वोंको रोका जा सकता है.  8)  धार्मिक ग्रंथो एवम् शास्त्रोमें स्पष्ट कहा गया है कि प्रातःकालके ब्राह्म-      मूहुर्तके दो घंटे उपासनाके लिये सर्वोत्तम है. मगर मेरे निवासके ईर्द-      गिर्द स्थित कई मस्जिदोंसे एक ही वक्तमें एकसाथ 100 से ज्यादा      स्पीकरोंसे सुबह पूजाके समय इतना शोरोगुल मचता है कि  ध्यानसे  ईष्टदेवकी माला  तो छोडो,ढंगसे आरती भी नहीं गा पाता..ये कहाँ      तक सहे और क्यूँ सहे ? क्या हम उनको ईबादतमें कभी डीस्टर्ब करते      है ? जब ये शुरू किया गया तब किसी स्ट्रोन्ग अपोझ से जनहितको      आगे करके सरकार या न्यायपालिकाने रोक दिया होता, तो आज इस      इलाकेके लोगोंको जबरन् सुबह 5 बजे न उठना पडता.अब ये शोरोगुल      कैन्सरकी तरह पूरे देशकी सुबहको बिगाडता चल पडा है. आप यकीन      किजीए कभी कभी तो मुझे संदेह होता है -मैं भारतमें हूँ या पडौशी      देशमें ?   9) बंधारणकी रचना हुई तब गांधीजी जैसे महापुरुष जिंदा थे, डा.बीआर    आंबेडकरजी थे. इन दीर्घद्रष्टाओने पीछडोंको मुख्य धाराकी समकक्ष  विकसित करने हेतु आजादीके कुछ साल तक "आरक्षण-नीति" अपनानेकी   सलाह दी, जो कि सबने मान ली. लेकिन आज 6 दशकके बाद भी   वही नीति चलाई जा रही है. आश्चर्य यह है कि किसी भी सरकारने इस  नीतिकी गंभीरतासे समीक्षा नहीं की. वजह बिल्कुल साफ है-वोटबैन्ककी   राजनीति. अब तो ये सवर्णोंके साथ सरासर अन्याय नहीं है तो ओर क्या  है ? आपकी विवेकबुद्धि पर छोडता हूँ ये मामला...कुछ करनेका वक्त पक   गया है. 10)  अब तककी सरकारोंके अर्थशास्त्री गरीबीके मानदंड और उसकी       प्रतिदिन न्यूनतम आय, महँगाइ-दरकी अपेक्षा क्या होना        चाहिए ये भी तय नहीं कर पा रहे हैं इससे बडा दुर्भाग्य इस       देश या लोकतंत्रका क्या होगा !! वास्तवमें दूर देहातमें जाकर       एक सप्ताह इन गरीबके साथ उसकी झोंपडी  में जाकर रहे       तब मानदंड और सही आय पता चले. इस मामलेको जरा       ग्रासरूट लैवलसे सोचकर नीति बनाई जाय तो वह जनसामान्यमें       हास्यास्पद नहीं होगी.  11)  एक अन्तिम मुद्दा बताकर मैं ये पत्र समाप्त करूँगा. आपको बुरा       लगा हो तो अविवेक के लिये क्षमस्व मी. मेरा ईमेल है-      mkumarthaker52@gmail.com हमारे शास्त्रोंकी और ऋषियोंकी       भाषा-संस्कृतका न के बराबर विकास रहा है..कुछ प्रोत्साहक सरकारी       नीति व योजनाओंकी  नितांत आवश्यकता है. आप कुछ करें....

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Aaj desh bahut gart me ja chuka hai.hamne jab se hambhali hai tab se lekar aak tak yahi dekhta aa raha hu ki desh or hi piche ja raha hai.aise me aaj hame sampuran bharat me koi aisa aadmi ni dekha jo ki is desh me apna kritimaan pataka lahra sake or is bharat ko fir se waisa bana de jaisa ki is desh ka sabhi kalpna karte hai.lekin dekhte dekhte bhagwan ne ek aise aadmi ko vej diya jo pura bharat basi ka sapna sakaar kr sake.jaise ram ji ko hanumaan ji ka sahara mila tha waise hi aaj hamare bharat mata ko modi ji ka sahara mil sakta bus ham sabko thodi mehnat krni padegi.to aaj hamne thaan liya hai ham ni hamare sabhi sathi ne sankalp kiya hai ki modi ji jab tak p.m ni bante tab tak ham sab ko koi apne se juda kam ni krna hai or to or agar modi ji ke liye jaan dene ki jaruarat pade to usse v ham log piche ni hat sakte.ab yaha pe kitna like ki hm sbke dil me sirf or sirf modi ji hi hai.tabhi to 2 mahine se apna sara kam chor kar padhaai likhaai or khana pina sabhi ko bhul kar sosal midiya se lekar apne chetra me ek ek aadmi se mil kar hath jor kar modi ji ka bhot mangte fir rahe hai.ab modi ji hamse milenge ya hame kuch de denge isse hame koi matlab ni jaise aaj ji rahe hai waise kal v ji lenge.lekin aaj bharat mata ki pukaar hai modi.har har modi ghar ghar modi.aap v modi ji ko vot de khud ke bare me aap ni sochte to aane wale pidhi ke bare me or apne desh ke bare me soche.or modi ji ke bare me jaane ke liye unke lahar ke bare me janne ke liye hamse facebook pe sampark kre....mera id hai.dilraj.rohit@gmail.com aap fb pe hamse jude or modi ji ke bare me sabhi ko batay or bjp ke liye bhot mange.jay hind

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के द्वारा: keshavdattbadu keshavdattbadu

चुनावी Rally aur bhashan history ki class aur examination ki preparation karane wali jagahein nahi hoti. Bhashano me saari batein ati shookshma tathya parak hi nahi ki jati balki dher saari baatein Sthool Sanketik aur symbolic hoti hai. jo public ke mood ko dekhte hue usme utsah bharne ke liye ek achche neta (Leader) dwara kahi jati hai....... Aise kisi bhi uddharan ko lekar virodh ki mansha rakhne wale log koi bhi kahani garh sakte hai........Nalanda aur Takshshila ati Pracheen kaal se Bharat ke gaurav rahe hai.. ek doosre ke sahyogi aur poorak ke me roop Bharat ke sandarbh me dono hi vishwavidyalayon ke naamon ka ullekh vyakti samanyataya ek saath hi karta hai.....Aaj ka Bihar aur Pracheen Magadh Samrajya ek hi nahi hai...Bhartiya Itihaas ke sabse aguravsaali prishtha Magadh samrajya ke naam se hi likhe hote hai... Us Magadh ka udgam aur mukhya kshetra ke kush bhaag aaj ke Bihar me padte hai Jisme Nalanda zaroor hai per kya Jaankaron ko yeh nahi pata ki Bharat ke Itihaash ke sabse gauravshali samayon me yah desh Brihattar Bharat ke Roop me raha hai aur usme bhi adhiktam samay yah netritva Magadh ke netritva me raha hai aur us gauravshali Magadh me Hamesha Nalanda aur Takshshila ek hi samrajya ke anga rahe hai.......Aur Modi jaise Leader ek Aitihashik gauravshali rajya me jakar us rajya ke janutshahvardhan ke liye Mahattam gaurav pradarshit karne wale atiutshahvardhak ullekh hi rakhne ka prayash karega...........Aur rahi baat Bajpai ji se Tulna ki to Bajpai ji to koi bhi tulna nahi kar sakta.........Wo to Bhooto na bhavishyati hain......... Modi ka apna karishma hai.....

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केजरिवाल सरकार के ४९ दिन के कार्य दिल्ली मे ६६७ लीटर मुफ्त पानी आधे दाम पर बिजली कर २८ लाख उपभोक्ताओं को लाभ बिजली कम्पनियों की आदित कराने का आदेश ४०० यूनित खर्च करने पर बिजली दर ५० % घता दी गयी अम्बानी के कम्पनी के विरोध भ्रस्टाचार पर कड़ा कदम उठाया शीला दिक्षित के खिलाफ भ्रस्टाचार विरोधी अभियान चलने पर कोंग्रेस सरकार ने समर्थन वापस की धमकी दी दिल्ली जल बोर्ड मे ६ सौ करोड के घोटाले मे लिप्त १३ अफसरों पर ५ मुकडमे दर्ज किए गए जिसकी सी बी आी जांच बैठाईी गयी स्टिंग अप्रेसन मे घुंस लेते एक अधिकारी को जांच मे सही पाया गया उसे नीलम्बित किया गया दिल्ली मे चौराहे पर पुलिस ने पैसे लेने काम कर दिये थे दफ्तर मे बाबू घुंस लेने से डरने लगे थे जाडों मे दिल्ली मे फुत्पाथ पर सोये गरीब को बनाये गए राहत शिविर मे पहुंचाया जाता था आप की नकल करते हुए भाजपा ने भी वालेंटेयर बनाने शुरू किए इन सभी कार्यो से परभावित होकर संघ के मजोहन भागवत ने भाजपा को चेतेने की नासीहत दी थी तथा आप को भाजपा के लिये खतरा बताया था क्या भ्रस्टाचार पर उठाया गया कड़ा कदम नहीं था क्या मिडिया इन सब को भूल गयी या उनके रेकॉर्ड्स जल गए

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                   यह सच है कि भारतीय स्वतंत्रता के लिए .तात्कालिक विश्व परिस्थितियाँ ..कारण बनीं ..जैसे... .१. ब्रिटेन व अन्य योरोपीय संगठन के देशों का लगातार राजनैतिक रूप से कमजोर होते जाना, जिसका कारण हिटलर का अभुदय कहा जा सकता है....  २. ब्रिटेन में प्रधान मंत्री एटली की लेबर पार्टी की सरकार का आना....एवं अब कमजोर ब्रिटेन द्वारा भारत को सम्हाल पाना मुश्किल होगया था.. .३. विश्व में अमेरिका-गणतंत्र  का अभुदय एवं तानाशाही व राजशाही परम्पराओं का अंत होते जाना..              परन्तु साथ ही साथ यह भी सच है कि -- १.मूल रूप में ब्रिटेन समस्त भारत का आर्थिक शोषण कर चुका था लुटा-पिटा..गरीब..दीन-हीन भारत अब उनके किसी कम का नहीं रह गया था .. २. महात्मा गांधी एवं कांग्रेस के आन्दोलन जिसे समस्त भारतीय जनता का करो य मरो रूप में पूर्ण सक्रिय समर्थन प्राप्त था ..ने ब्रिटेन साम्राज्य के ताबूत में आख़िरी आवश्यक कील ठोकने का कार्य किया ऑ                    अतः निश्चय ही हम महात्मा गांधी के कार्य के महत्त्व को कम नहीं कर सकते ..

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' आप ' पार्टी नें भारी अप्रत्याशित सफलता प्राप्त की है..मेरी समझ में कांग्रेस सरकार में 2G, CWG, , कोयला घोटाला इत्यादि भ्रष्टाचार के कारण जनता गुस्से से उबल रही थी. मौका मिलते ही उसनें अपना बदला ले लिया. बी जे पी इस अवसर का लाभ उठाने में कामयाब नहीं हो सकी. विकल्प के रूप में बी जे पी की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिन्ह लगा हुआ है. कांग्रेस की गिरावट को लाभ तो . ' आप ' को तो मिलना ही था. स्थिति ऐसी है कि जो स्पेस कांग्रेस खाली करती है उसे अगर बी जे पी नहीं भरती है तो ' आप ' पार्टी के लिए यह स्वर्णिम अवसर है. आशाही कि ' आप ' पार्टी जनता को निराश नहीं करेगी. कुछ आशंकाएं व्यक्त कि जाने लगी हैं. कुछ लोग कहते हैं केजरीवाल कांग्रेस के एजेंट हैउन,. इन्हें कांग्रेस ने खड़ा किया है बी जे पी को रोकने के लिए क्योंकि कांग्रेस अपने को इस कार्य के लिए असमर्थ पाती है. ' आप ' एन कुछ संदेहास्पद चरित्र वाले लोग भी प्रवेश पा गए हैं. इसमें से कुछ कश्मीरी आतंकवादियों , अलगाववादियों, माओवादियों के समर्थक हैं. ये कौन लोग हैं और ' आप ' पार्टी में किस उद्देश्य से घुस रहे हैं, यह भी रहस्य में आच्छादित है. कि क्या य़े लोग सिविल सोसाइटी में लोकतंत्र को समाप्त करने का वही काम करना चाह रहे हैं जो आदिवासी इलाकों में बन्दूक से माओवादी कर रहे हैं. कुछ लोगों को शंका है कि यह नक्सलवादियों, माओवादियों का ही आउटफिट है. ये लोग अपनी विचारधारा के बारे में भी नहीं बताते हैं. आशंकाएं अनेक हैं.

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भारतीय जनमानस के अंदर लोकतंत्र की समझ अभी पैदा ही नहीं हुई है क्योंकि यह जनता अभी भी खुद को किसी न किसी परिवार की कृपापात्र माने बैठी है / चाहे पढ़ा लिखा हो या अनपढ़ वह भारत की वंशमूलक राजसत्ता को अपने अवचेतन से निकाल नहीं पाया है , घूम फिरकर पुनः किसी शासक के परिवार अथवा वंशज को अपना मसीहा या रक्षक मानते हुए समर्पण को तयार यह समाज शासन व्यवस्था की जिम्मेदारी लेने में समर्थ नहीं हो पा रहा है / यहाँ कदाचित कोई योग्य परन्तु सामान्य व्यक्ति पहुँच भी जाये तो भी वह खुद को किसी का कृपभाजन माने बैठा है , क्योंकि आखिर मन में जनम जनम की गुलामी के संस्कारों चिपके हुए हैं, आज कांग्रेस में अनेक नेता हैं जो राहुल सोनिया से कहीं बहुत वरिष्ठ विचारवान भी हैं ,परन्तु उनके विचारों को दीमक लग चुके हैं , उनके अंदर का स्वाभिमान मर चुका है , उनके भीतर चापलूसी के बीज अंकुरित हो चुके हैं, स्वार्थ का घना कोहरा आँखों में छाया हुआ है, उन्हें विलासिता का विष अमृत तुल्य लगने लगा है, अहसानों के बोझ तले दबे हुए हैं, नैतिकता नष्ट हो चुकी है , शायद सत्ताधारी लोगों का यही सबसे बड़ा कवच है /

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GANGSTER COMPOSITION IN INDIA /WHICH CASTES HINDU RELIGION OF PEOPLE ENVOLVE OF GANGSTER IN INDIA AND SAFETY OF CONCERND PROBLEM. OF HINDU RELIGION BACKWARD CASTE. TO CONCENTRATE LAWYER AND M.B.B.S/M.D /M.S DEGREE BY MANTU KUMAR SATYAM, ,Religion-Hindu,Category-O.B.C (Weaker section), caste-Sundi(O.B.C weaker section), SEX-MALE,AGE-29Y Add-s/o.SHIV PRSAD MANDAL, FRONT BAIDYNATH TRADING /HARDWARE,AIRCEL MOBILE TOWER BUILDING, CHOICE EMPORIUM SHOP BUILDING,Near jamuna jour pool, near ramjanki mandir,castair town,SARWAN/SARATH MAIN ROAD, ,DEOGHAR,DISTRICT-DEOGHAR, JHARKHAND-814112,INDIA . MY VOTER ID CARD DETAIL-CONSTITUTION DEOGHAR ASSEMBELY,DIST-DEOGHAR,JHARKHAND, INDIA, VOTER ID CARD NUMBER-MQS5572490,AADHAR CARD ENROLLMENT NUMBER-2017/60236/00184,DATE-10/12/2012 ,TIME-13:43:52,AADHAAR NUMBER-310966907373 ) occupation- MSCCRRA study from SMUDE,SYNDICATE HOUSE ,MANIPAL KARNATAK, POST GRADUATE DIPLOMA IN HUMAN RIGHTS FROM INDIAN INSTITUTE OF HUMAN RIGHTS ,NEW DELHI (SESSION-2012-14,2ND YEAR In INDIA which HINDU RELIGION CASTES castes have sufficient no. of lawyer and M.B.B.S /M.D/M.S degree profession .Which castes envolve /composition of gangster in INDIA .without sufficient no. of lawyer and M.B.B.S /M.D/M.S degree profession have not possible to envolve/composition of gangster in INDIA . For the matter of attention/sense which HINDU RELIGION castes have to face the problem of gangster in INDIA and have not justification by court pending of cases in long time in court /without evidence have not favoure (JUSTIFICATION).of victim .FOR THE FIGHT OF FACE OF ABOVE PROBLEM CONCENTRATE OF THE DEGREE

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ऱाइट टु रिजॆक्ट मुल्क मॆ एक बडी बहस कॆ लियॆ एक बडा प्लॆटफार्म बिल्कुल तैयार है, हमनॆ पिछलॆ लम्बॆ वक्त सॆ यहा की महत्वाकान्क्षी राजनीति पर 6 एपिसॊड की एक पटकथा "आखिरी क़यामत"लिख डाली, लॆकिन अब उसकॆ प्रसारण की भी जरूरत न रही, भारतीय चुनाव आयॊग की वॊटिग मशीन पर आखिरी बटन "रिजॆक्ट आल" कॊ चस्पा कर सुप्र्रीम कॊर्ट नॆ फरमान पर‌ तामील की मॊहर लगवानॆ पहुचा दिया इस दॆश कॆ हर घर मॆ | कही यह भारतीय राजनीति कॆ विध्वन्स का वक्त तॊ नही आ गया ? इस मुल्क का दुर्भाग्य है, यहा पापाचार मॆ आकन्ठ डूबॆ लॊग इसकी रहनुमाई करतॆ रहॆ है, भारत कॆ मतदाता अपनॆ मत का प्रयॊग कर हर बार इन्हॆ करॊडपति या अरबपति बननॆ यहा की सन्सद और विधान सभाऒ मॆ भॆजतॆ रहॆ है, सबसॆ अचम्भॆ की बात तब सामनॆ आई जब यहा का बुधिजीवी समाज बजाय राजनैतिक अपराधियॊ कॊ सता सॆ बाहर फॆकनॆ कॆ उनकी ताजपॊशी मॆ शिरकत करता नजर आया, सुप्र्रीम कॊर्ट कॆ इस फरमान का अन्दॆशा मुझॆ एक वर्ष पहलॆ हॊ गया था, जब मैनॆ पहली बार एक लॆख लिखा था "स्टैन्डर्ड रॆट्स‌ फार पालिटिशियन इन‌ इन्डिया" और उसकॆ बाद "हाउ एन्ड व्हाई द क्रिमिनल्स आर कमिग बैक अगॆन एन्ड अगॆन‌ इन‌ इन्डियन पार्लियामॆट एन्ड विधान सभा" इस सारॆ ड्रामॆ कॊ सिर्फ एक पब्लिक मीटिग तक मॆ समॆटना इसकी अन्तरज्वाला कॆ साथ अन्याय करनॆ जैसा था, इसलियॆ "आखिरी कयामत" की रचना करनी पडी | लॆकिन इसॆ फिल्मानॆ कॊई आज तक आगॆ न आ सका, मामला राजनीति सॆ जुडा था, जाहिर सी बात है, इसकॆ फिल्माकन कॆ दौरान राजनैतिक अपराधियॊ कॆ गुन्डॆ आडॆ आतॆ | कहतॆ है, जहा चाह वहा राह, सुप्र्रीम कॊर्ट नॆ रातॊ रात यहा कॆ राजनैतिक अपराधियॊ की नीद उडा दी है, लगता है सुर्ख रग का और अनॊखा बटन " रिजॆक्ट आल या नन" भारतीय राजनीति कॆ ताबूत मॆ आखिरी कील ठॊकनॆ आ गया | दरअसल इस मुल्क की सत्ता पर प्रत्यक्ष या परॊक्ष रूप सॆ 5 सॆ 10% लॊग कई सालॊ सॆ काबिज है, जॊ यहा की बाकी 90% बॆशुमार अवाम कॊ अपनॆ हितॊ कॊ साधनॆ मॆ इस्तॆमाल कर रहॆ है, ब्रह्मामुख वन्शावली मॆ कहा गया है, कि पूरी दुनिया मॆ सिर्फ भारत ही एक ऐसा मुल्क था जॊ सबसॆ ज्यादा पवित्र था लॆकिन आज दुनिया का यही मुल्क व्यभिचार,लूट राजनैतिक भ्रष्टाचार,कत्लॊ गारद और धॊखॆबाज मुल्क कॆ नाम सॆ जाना जाता है, सत्ता कॆ दलाल यहा साल दर साल ताकतवर हॊतॆ गयॆ, और आज हालात यहा तक पहुच गयॆ कि एक गवर्नर नॆ राजभवन कॊ ही कॊठॆ मॆ तब्दील कर दिया और जब पॊल खुली तॊ इस्तीफा दॆकर चुपचाप निकल गया | इस मुल्क मॆ सुप्रीम कॊर्ट ही एक मात्र विकल्प है, जॊ मुल्क की बरबादी कॊ रॊकनॆ कॆ लियॆ चाहॆ तॊ राष्ट्रद्रॊह की परिभाषा कॊ अमल मॆ ला सकता है, जितना बडा गुनाह हॊगा उतनी बडी सजा का हकदार कहलायगा | सबसॆ अहम सवाल, अगर रिजॆक्ट टु राइट कॊ 80% वॊट पडतॆ है, तब इस मुल्क मॆ प्रजातन्त्र कॊ ढहानॆ वालॆ राजनैतिक अपराधियॊ की सजा क्या हॊगी ? सूबॊ मॆ जॊ सियासी पार्टियॊ कॆ छॊटॆ मॊटॆ बाउबली जॊ यहा की अवाम कॊ पूरी तरह अराजकता कॆ दलदल मॆ धकॆल दॆना चाहतॆ है, चाहॆ वॊ पूर्वाचल हॊ या बिहार,उ.प.या कॊई और राज्य | इन लॊगॊ कॆ लियॆ विधान सभाऒ तक का सफर तय करनॆ कॆ लियॆ सन्सद कॆ दॊनॊ सदनॊ कॊ विवश करकॆ एक अध्यादॆश "हर चुनाव कॆ लियॆ जरूरी परीक्षा" की जरूरत आन पडी है, इन लॊगॊ कॆ लियॆ इन जगहॊ पर पहुचनॆ कॆ लियॆ कॊई परीक्षा या मानदण्ड अगर अपनाया जाता है, तॊ मुनासिब है, अपराधियॊ कॆ हौसलॆ पस्त हॊ जायॆगॆ, और भारतीय राजनीति का अपराधीकरण धीमा हॊ जायगा, इस भूमण्डल पर बसी हुई 700 करॊड आगत्मायॆ जॊ इस वक्त कॆ घटनाक्रमॊ का जिम्मॆदार सिर्फ और सिर्फ कलियुग की भागीदारी समझ फिर सॆ वही बार बार दॊहरा रही है, ब्रह्मा मुखवन्शावली मॆ कहा गया है, कि 1250 वर्षॊ कॆ कलियुग कॆ खात्मॆ पर सगम युग की दहलीज पर बॆशुमार धमाकॆ हॊगॆ, हर तरफ अपराध, कत्लॊ गारद‌,लूट, राजनैतिक भ्रष्टाचार,व्यभिचार, और वन्डरलैण्ड्मार्क‌ क्राइम‌ और सबसॆ बडी चौकानॆ वाली, यॆ है, कि आज इस दुनिया मॆ 80% खतरनाक अपराधॊ मॆ लिप्त उन लॊगॊ कॆ आकडॆ बॆहद चौकानॆ वालॆ है जिनकी उम्र 20 सॆ 40 वर्ष‌ कॆ बीच है, इस पूरॆ ब्रह्माण्ड और भूमन्डल पर विछॆ साइस कॆ कॆबिल अपनी सौ बरस की उम्र यहा खपा चुकॆ, अब तॊ बस इन्सानियत कॆ खात्मॆ कॆ लियॆ यहा गौरी और या फिर प्रिथ्वी मिसाइल का बटन दबाना बाकी है,

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एक और सरकार चुनाव से पहले संप्रदायिक दंगे होने की आशंका से डरा रही है और दूसरी और सच्चे- पक्के और ईमानदारों पर झूटे इलजाम लगाकर उन्माद और आक्रोश फैला रही है। देश के शिरोमणि संत स्वामी रामदेव को लन्दन में हीथ्रो हवाई अड्डे पर रोककर ८ घंटे की पूछ- ताछ से उनके करोड़ों अनुयायों में गुस्सा व्याप्त। पूर्व सेना प्रमुख वी के सिंह, अशोक खेमका जिन्होंने राबर्ट-वाड्रा का घोटाला उजागर किया, दुर्गा शक्ति नागपाल जिन्होंने खनन माफिया को उजागर किया को गलत तरीके से फसाकर सरकार उनका मुंह बंद करना चाहती है। सरकार की सच को झूट में बदलने की कोशिशें देश में उन्माद,आक्रोश और दंगों को बदावा देंगी। उतर-प्रदेश में जहाँ साम्प्रदायिक दंगों ने ४८ लोगों की जान लेली और हजारों लोगों को बेघर कर दिया सरकार ने जिम्मेवारी ना लेते हुए विपक्ष पर ठीकरा फोड़ दिया और उन्हें गिरफ्तार करना शुरू कऱ दिया है। जो सरकारें राजधर्म नही निभाती वही साम्प्रदायिक दंगे बड़ाने के लिए जिम्मेवार होती हैं। ये भ्रष्ट सरकारें अपनी कुर्सी बचाने के चक्कर में और वर्चस्व बनाये रखने के लिए पूरे देश को दंगो की आग में धकेल सकती हैं। आर एम मित्तल मोहाली

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एक और सरकार चुनाव से पहले संप्रदायिक दंगे होने की आशंका से डरा रही है और दूसरी और सच्चे- पक्के और ईमानदारों पर झूटे इलजाम लगाकर उन्माद और आक्रोश फैला रही है। देश के शिरोमणि संत स्वामी रामदेव को लन्दन में हीथ्रो हवाई अड्डे पर रोककर ८ घंटे की पूछ- ताछ से उनके करोड़ों अनुयायों में गुस्सा व्याप्त। पूर्व सेना प्रमुख वी के सिंह, अशोक खेमका जिन्होंने राबर्ट-वाड्रा का घोटाला उजागर किया, दुर्गा शक्ति नागपाल जिन्होंने खनन माफिया को उजागर किया को गलत तरीके से फसाकर सरकार उनका मुंह बंद करना चाहती है। सरकार की सच को झूट में बदलने की कोशिशें देश में उन्माद,आक्रोश और दंगों को बदावा देंगी। उतर-प्रदेश में जहाँ साम्प्रदायिक दंगों ने ४८ लोगों की जान लेली और हजारों लोगों को बेघर कर दिया सरकार ने जिम्मेवारी ना लेते हुए विपक्ष पर ठीकरा फोड़ दिया और उन्हें गिरफ्तार करना शुरू कऱ दिया है। जो सरकारें राजधर्म नही निभाती वही साम्प्रदायिक दंगे बड़ाने के लिए जिम्मेवार होती हैं। ये भ्रष्ट सरकारें अपनी कुर्सी बचाने के चक्कर में और वर्चस्व बनाये रखने के लिए पूरे देश को दंगो की आग में धकेल सकती हैं। आर एम मित्तल मोहाली

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आज की स्थिति का बहुत बढ़िया मंथन किया गया है| विश्व पटल पर देश की साख में जो उठा पटक हो रही है उससे हर सच्चे नागरिक की चिंता स्वाभाविक है| इस  लेख में सब कुछ स्पष्ट कर दिया गया है कि अंदरूनी कलह किसी भी पार्टी को कमजोर कर देती है| देश का पी एम् मोदी हो या राहुल, केवल एक व्यक्ति के अच्छे होने से पूरे तंत्र में सुधार आ जायेगा, ऐसा कहना जल्दी होगी| अगर एक व्यक्ति सही सोच वाला है भी तो बाकि जो पक्ष और विपक्ष में जमे पुरानी सोच वाले नेता हैं उनकी सोच को बदलना न तो मोदी के हाथ में है और न ही राहुल के| फिर भी देश को चुनाव प्रक्रिया से तो गुज़रना ही पड़ेगा जबकि देश का हर जागरूक वोटर जानता है| चुनावों से पहले बड़े लुभावने अजेंडे तैयार किये जाते हैं पर चुनाव पूरे होते ही उन्हें रद्दी की टोकरी में फैंक कर कुर्सी को बचाने के दाव-पेंच शुरू कर दिए जाते हैं| क्या कोई ऐसी तकनीक नहीं निकल सकती जिस से अपने वायदे पूरे न करने वालों को हटाकर किसी दुसरे को परखा जाये?

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चित भी मेरी पट भी मेरी       ,,,,,,,,,,,काग्रेस  एक एडमिनिस्ट्रेटर की स्तिथी मैं है यदि गेम चैंजर यानी खाद्य सुरक्षा विल पारित करने मै सक्षम होती है तो भी या नहीं होती है तो भी ,,,,आम जनता मैं यह सिद्ध करने की कोसिश मै सफल हो ही जायेगी कि मैं आम जन के साथ हॅू,,, हम ऐसा कुछ कर रहे हैं जिससे आम जन राहत महसूस करे ,,,,,,, विरोध करने वाली पार्टीयां विपरीत असर महसूस करैगी ,,,,,,,,दोनों परिस्तिथीयों मै लाभांवित कांग्रेस ही हो रही होगी ईस मुद्दे पर,,,,,,,शायद यह एक प्रतक्ष मै आम जन का हितकारक हो सकता प्रतीत होगा,,,,,,,,,,,वाकि अन्य मुद्दे कितने असर डालेंगे यह समय ही बतायेगा ,,,,,              ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,हम तो,,,,,,,,,,,,, ओम ,,,,,,शांति,,,,,,,,,,,, शांति,,,,,,,,,,,,शांति ,,,,,,,का जप करते ही समय विताते मिलेंगे,।

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आप इत्तेफाक रखिए, दूसरी साईडमें जो लोग कहते हैं वो सच है लेकिन आधा सच है । हकिकतमें बेन्कर्स ब्रिटन के साम्राज्य को ही तोडना चाहते थे । माना की ब्रिटन का ताज बेंकर माफिया का गुलाम था लेकिन ये माफिया किसी को चांच नही देते । अगर कोइ सरफिरा सम्राट आ जाता तो बेंकरों की ही खाल उतार लेता । अपने वन वर्ल्ड, वन गवर्नमेंट के बीच कोइ भी आये उसे हटा देते हैं । भारत आने से पहले गांधी को पूरा ग्लोबलिस्ट बना दिया था, उन को भारत या भारत की जनता से कोइ प्यार नही था । पूरे पूरे थेयोसोफिस्ट और मेसन बन गये थे । अंग्रेज से वो बेन्कर्स के प्लान के हिसाब से ही लडे और बेंकर्स के प्यादों को राज दिलवा दिया । ये प्यादे आज धीरे धीरे भारत को ग्लोबल सरकार के हवाले कर रहे हैं । भले अभी उस सरकार ने आकार नही लिया लेकिन तैयारी पूरी है ।

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माननीय, अति विनम्रता के साथ निवेदन करना चाहता हूं कि जिस भांति पंजाब में रहने वाले पंजाबी, गुजरात में रहने वाले गुजराती और बंगाल वासी बंगाली कहाते हैं, उसी भांति हिन्‍दुकुश पर्वत के इस पार रहने वालों को सदियों से हिन्‍दुस्‍तानी कहा जाता रहा है, चाहे वे किसी भी धर्म, मत व संप्रदाय को मानने वाले हों। 'हिन्‍दुस्‍तान' और 'हिन्‍दुस्‍तानी' शब्‍द सदियों से चला आ रहा है और वे अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर उसी तरह जाने व माने जाते हैं जिस भांति अमरीकी, ब्रितानी, अफगानी और इटालियन नागरिक के रूप में उनकी पहचान है। समझ नहीं आता कि हिन्‍दुस्‍तान के रहने वाले को हिन्‍दुस्‍तानी कहना किस दृष्टिकोण से गलत माना जा रहा है। यह अवश्‍य है कि तथाकथित धर्मनिरपेक्षियों को इस शब्‍द से चिढ है। मेरा सुझाव है कि कृपया वे संविधान संशोधन के माध्‍यम से 'हिन्‍दुस्‍तान' और 'हिन्‍दुस्‍तानी' शब्‍द को असंवैधानिक व अपराधिक कृत्‍य की श्रेणी में विभाजित करवाने के लिए संसद में प्रस्‍ताव पारित करवा दें ताकि इन शब्‍दों का प्रयोग दंडनीय अपराध बन जाए। मेरे प्रिय भाई, जब कोई हिन्‍दुस्‍तानी (भले ही वह किसी भी धर्म और पंथ को मानने वाला हो) राष्‍ट्र के प्रति अपनी पूर्ण निष्‍ठा रखता है तो वह अपने आपको 'हिन्‍दू राष्‍ट्रवादी' कहने का अधिकारी है। फिर आप ही बताइए कि संविधान की किस धारा के अंतर्गत ऐसे लोगों को दोषी ठहराया जा सकता है। यदि इस बात को कानूनन रूप से उचित ठहराया जा सके तो शायद मुझ जैसे अल्‍पज्ञ के ज्ञान में भी वृद्धि होगी और मेरे जैसे लोग अपनी भूल को सुधारने हेतु प्रेरित होंगे अन्‍यथा लगता है, वह दिन दूर नहीं जब महाराष्‍ट्र में गूंज रहे 'हिन्‍दू राष्‍ट्रवादी' घोष की तरह शायद शीघ्र ही यह घोष संपूर्ण भारत की अनगूंज बन जाए। --रमाकान्‍त शर्मा, मानसरोवर, जयपुर

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नितीश कुमार का मोदी विरोध नितीश को तो कोई फायदा पहुचानेवाला नहीं हाँ उनकी पार्टी जदयू को nuksan जरुर पहुचने वाला है और इस बात को जदयू अध्यक्ष श्री शरद यादव को समझना पड़ेगा और यूँ फालतू की प्रधानमंत्री कौन बनेगा की बहस से फ़िलहाल निकलना पड़ेगा साथ ही अगर ये पार्टियाँ मेरा मतलब एन डी ए गठबंधन पार्टियों से है अगर ये पार्टियाँ सत्ता में अक्बिज कांग्रेस का सच में विरोध करना क हहती हैं और उसे सत्ता से उखड फेकना चाहती हैं तो उन्हें आपसी मतभेद भुलाकर केवल और केवल कांग्रेस का विरोध एकजुट होकर करना चाहिए और यही देशहित और जनहित में है वरना दो बंदरों की लड़ाई में कुत्ता रोटी ले जायेगा आज जनता भी कांग्रेस के विरोध में है क्यूंकि इस पार्टी के राज में भयंकर महंगाई बढ़ी है और अनगिनत घोटाले हुए हैं गरीबों को न्याय नहीं मिला है और देश भयंकर आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है इसका जिम्मेवार कांग्रेस और उनकी भ्रष्ट नीतियों के चलते है अतः वक्त आ गया है जब सांप्रदायिक और धर्म निरपेक्ष की लडाई छोड़ एकजुट होकर कांग्रेस को उखड फेंका जाये

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पाँच का जवाब कानपूर की मशहुर तवायफ अजीजन बी के कोठे के परदे के पीछे की सच्चाई थी की वह सन १८५७ के क्रांतिकारियों का मंदिर था | जब अंग्रेजों को अजीजन बी के क्रन्तिकारी होने का पता चला तो उन्होंने उन्हें तोप से उड़ा दिया और लाश को एक सुनसान जंगल में ले जाकर किरासन तेल छिड़क कर जला दिया | शाम में जब अजीजन बी की चिता के पास नानासाहेब पेशवा पहुंचे , तो अपने सहयोगी की आखों में आसूं देख कर बोले | गोरी सोवे सेज पर , मुख पर डारे केश | चल खुसरो घर आपनो, रैन भई चहु देश | अपने आंसुओं से इस चिता की आग को ठंडी मत करो ,इसे यूँ हीं सुलगती रहने दो | अजीजन बी चिर निंद्रा में लीन हो गई है , तुम्हारे आंसुओं की ठंढक से जग जायेगी | चाणक्य ने कहा था - शांति से जीना चाहते हो तो सदा लड़ने के लिए तैयार रहो | मै कहता हूँ -- पाकिस्तान पाँच मारता है तो तुम पचास मारो दो दिन में औकात पर आ जायेगा | जिसकी औकात खड़ा होने की नहीं वह बाप को लंगी मारता है | हमारे नेताओं के पर्दे के पीछे की सच्चाई है ,कि ये खुद नहीं चाहते की सीमा पर शांति कायम हो क्योंकि सीमा पर शांति के साथ हीं इनकी अपनी कुर्शी अशांत हो जाएगी | अरे नामुरादों ,कुछ तो शर्म करो | कब तक आंसूं बहाते रहोगे ? कब तक छाती पिटते रहोगे ? शहीदों कि शहादत पर पानी मत डालो | इसे ज्वाला कि तरह अपने सीने में धधकने दो और पाँच का जवाब पचास से दो नहीं तो अपनी अपनी बीबी कि चूड़ियाँ पहन कर गुनगुनाते रहो | मोरी कलइयाँ शुकवार हो , चुभि जाला कंगनवा |

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वर्तमान राजनितिक परिपेक्ष्य में सचमुच गद्दी किसी को बुरी नहीं लगती और राजनितिक गलियारों में कोई पार्टी ऐसी नहीं है जो प्रधानमंत्री बनना नहीं चाहता उनमे से कुछ तो ऐसे हैं जो लोगों से कहलवा रहे हैं खुद नहीं कह रहे हैं और कुछ खुद को ही भावी पी एम् बता रहे हैं और उनको अछि तरह पता है यहाँ की जनता कैसी है जिसकी चर्चा टेलीविजन पर रोज हो रही हो वाही उनके लिए प्रिय नेता लगने लगत है क्यूंकि आज अपने देश के कोई भी नेता जनता की समस्याएं क्या है जनता बढती महंगाई से किस तरह परेशां है उसका रोज का जीना कितना मुश्कील होता जा रहा है इसपर अब चर्चा हो ही नहीं रहा है केवल प्रधानमंत्री कौन बने इसकी ही चर्चा हर टेलीविजन चैनल पर हो रही है धन के बिना कितनी ही घोषित योजनायें पूरा नहीं की जा सक रही हैं और अपने देश का धन विदेशी बैंक में रखा हुवा है पर उसको वापस देश में लाने का कोई प्रयास आज देश के किसी पार्टी के नेता करते नहीं दिखाई देते लाखो करोड़ रुपयों का घोटाला मंत्रियों नेताओं और सेना के उच्च अधिकारीयों ने भी किया है उसकी चर्चा हो ही नहीं रही है केवल प्रधान मंत्री मोदी बने या राहुल गाँधी बने इसकी चर्चा ही जोरों पर है जो इस देश का दुर्भाग्य ही कहलायेगा और यह चर्चा ही होती रहेगी जब तक अगला लोक सभा चुनाव जो की २०१४ में होना है वह चुनाव संपन्न नहीं हो जाता अतः ऐसे वख्त में मेरे विचार से कौन उपयुक्त पी एम् उम्मीदवार होगा? इस बात की चर्चा मैं सही नहीं समझता और मैं जागरण से भी कहूँगा की वे अपने अख़बार एवं टेलीविजन के माध्यम से जनता की समस्याएं क्या हैं और इसके संधान के लिए कौन सी पार्टी आज क्या कर रही है यह जानकारी जनता को चाहिए सरकारें तो हर ५ साल बाद बनती ही रहती हैं क्या केवल सरकार के बन जाने से देश की जनता के दुःख दर्द मिट जायेंगे भ्रष्टाचार ख़तम हो जायेगा कला धन वापस आ जायेगा इसको मुद्दा नेता बनाये तो जनहित का कार्य कहलायेगा फिर चुनाव की चर्चा प्रधानमंत्री बनाने कि चर्चा हो तब जायज लगेगा

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लगता नहीं है कि भाजपा और संघ ने भारतीय चुनावी राजनीति से कोई सबक सीखा हो शायद इस वर्ग के नेताओं को दिवा स्वप्न देखने की आदत से हो गई है ? अभी २००९ में भाजपा के वरिष्ठतम वयोवृद्ध नेता श्री लाल कृषण अडवानी जी ५ वर्ष तक " प्राइम मिनिस्टर इन वेटिंग" थे और चुनाव के बाद तो उनकी पार्टी ने उनको लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के पद से भी जबरन हटाया था / वही हाल अब नरेन्द्र भाई मोदी का भी होने वाला है पहले तो उन्हें गुजरात को ही फ़तेह करना है केंद्र की राजनीति में तो बाद में नंबर आएगा या आएगा कि नहीं कौन जाने . भाजपा में किस प्रकार सेंध लग रही है और किस प्रकार दो गुटों का प्रादुर्भाव हो रहा है जिससे यह आंकलन किया जा सकता है कि भाजपा की एकता अब अखंड नहीं रह गई है.

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केजरिबल का कम अच्चा है और उसे पार्टी की मार्केटिंग करनी है जो आरोप बाद्रा पर लगाये है ये सब पब्लिक में आलरेडी है. केजरिबल टीम में अभी मात्र ७ लोग है जिनमे से ३ पर लगे आरोप बिना इन्क्वारी के अँधा को भी सही लग रहे है. जब ये आपनी टीम में लेनेसे पहले उनलोगों की जाँच नहीं कर सके तो पुरे देस के ब्रस्ताचार से कैसे लड़ेंगे. क्या से सही नहीं होता अंजलि, प्रसंत जैसे लोगो को लेने से पहले बो उनकी इन्क्वारी करते और जैसे ही कोई आरोप लगता जबाब देते. जाच तो सभी पार्टीज को करानी पड़ती है राजी या गैर राजी. गडकरी का मई फेन नहीं हु लेकिन उसपर लगे आरोपों में कोई दम नहीं है. फिर इनकी पार्टी से देश के और किसी मुद्दे पर बात करो तो ये बोलते है, जनता जबाब देगी. आरक्षण पर जनता का जबाब ये मन लेंगे. देश चलने के लिए खुद की एक इसे सोच होनी चाहिए जिसमे सब का भला हो इनको अपने मत से सर्ब हित के मुद्दों पर आपनी राय देनी चाहिए और जब भी कोई नया आरोप लगाये तो ये भी बताना चाहिए की जब इनकी पार्टी जीतेगी तो एस मुद्दे पर क्या नया नियम बनाएगी, सिर्फ आरोप लगाने से लोग थोड़ी देर टाइमपास करते है और फिर भूल जाते है नतीजा बो ही सिफर. जाती धर्म के आधार पर लोगो में फुट नहीं पड़े. भारत में लाखो मुद्दे है सब्सिडी, एफडी आई, विकास उनपर बोलना चाहिए इसे मुद्दे भी उतने चाहिए उनपर आपनी रे दे. अभी भारत की राजनीती में मात्र मोदी इसे आदमी है जिनकी सोच जनता की भलाई है. लोग अगर ये नहीं देख कर केजरिबल की टीम के संजय सिंह जैसे लोगो की तरह मोदी को मानवता का हत्यारा बता कर आपने को सेक्युलर साबित करने बालो के साथ रखेंगे तो इनमे और कांग्रेस में और सपा में क्या अंतर रहेगा. मुद्दे बहुत है जिनसे बहुत बड़ा जनाधार लिया जा सकता है पर लोग सिर्फ मुस्लिम और दलित और सो कॉल्ड बुद्धि जिबिओ के बोटो की राजनीती करते है जो पहले से ही बाते हुआ है, क्यों नहीं ये लोग बाकि बचे २०% लोग है उनकी बात करते जो निष्पक्ष रहकर सही को सही और गलत को गलत कह सकते है. देश में अच्छे लोगो की कमी नहीं है पर सिस्टम को बदलने की बात कोई नहीं करता. कोई नहीं चाहता की एक मुर्ख आदमी जो सिर्फ पैसे और भेद चाल से बोत करता हे उसे रोके. कोई नहीं चाहता की आंबेडकर का कॉपी पेस्ट संभिधान नए सिरे से नयी जरूरतों के मुताबिक बनी कोई नहीं चाहता की जनता को कोई अधिकार मिले, सब आपना उल्लू सीधा करने में लगे है और मुघे केजरिबल भी उन्ही में से एक लगता है. ये मेरी अपनी राय है. भारत के अब तक के अच्छे पीम में लाल बहादुर सस्त्री और अटल जी है, और आगे कोई बनेगा अभी के नेताओ में तो मोदी होंगे. ये लोग निस्वार्थ भाव से सच्चे मन से जन सेवा में आये जन सेवक है. बाकि के लिए पॉलिटिक्स एक पैसे और पॉवर का बिज़नस है. केजरिबल का प्लान तो लगता हे इनको सत्ता मिल जाये तो ये ५ साल तो जनता की रे जानने में ही लगा देंगे और अगर इनकी कोई राय होगी तो बो भी अंजलि संजय और भूसन जैसे लोगो से प्रभाबित होगी जिनका निष्कर्ष J P आन्दोलन के रिजल्ट मुलायम और लालू जैसा ही हो सकता है इससे अलग नहीं.

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आदर्शवाद को आज की जनता अब भूल चुकी है क्यूंकि विगत ३० सैलून से किसी आदर्शवादी नेता या पार्टी को इस देश ने नहीं देखा एक आदर्शवादी नेता लोकनायक जयप्रकाश जरुर दिखे थे जिनकी सम्पूर्ण क्रांति की पुकार सुनकर पूरे देश के युवा उनके समर्थन में आ गए थे और बहुतों अपना उभरता करियर भी छोड़कर एक बदलाव के लिए उनके पीछे हो लिए थे और इंदिरा गाँधी द्वारा आपातकाल की घोषणा के बावजूद जब चुनाव हुवा तो उनके तानाशाही को इस देश की जनता ने नकार दिया और जनता पार्टी का जन्म हुवा .आज के अरविन्द केजरीवाल कोई ऐसा करिश्मा नहीं कर पाए न यह उनके बूते में है जरुर आज देश की जनता कमरतोड़ महंगाई से त्रस्त है और आर्थिक विषमता अपनी चरम सीमा पर है अमीरी -गरीबी के बीच खायी उत्तरोतर बढती जा रही है और अरविन्द केजरीवाल केवल भ्रष्टाचार के मुद्दे को लेकर जनता को अपने साथ जोड़ रहे हैं लेकिन शायद उनको यह पता नहीं की उनकी यह दलील की महंगाई उस भ्रष्टाचार की देन है ऐसा इस देश की बहुत कम जनता हीं समझती है हाँ पढ़े लिखे शहर के लोग तो ऐसा समझते हैं और अभी तक अरविन्द केजरीवाल अपने साथ चंद शहरी लोगों की भीड़ को जोड़ पाए हैं अभी उनके संगठन में भारी कमी है और उनके चार लोगों की टीम में भी अलग अलग सोंच और विचार चल रहा है अतः लीडरशिप की कमी है और यह कहना की आने वाले दिल्ली के विधान सभा चुनाव अरविन्द केजरीवाल की पार्टी जीत हासिल कर पायेगी यह अतिशयोक्ति लगती है केजरीवाल को अभी केवल जन जागरण का काम करना चाहिए लगता है वे जल्दी में हैं कांग्रेस की सरकार ने ललकारा की कानून बनाना है तो चुनकर संसद में आईये और केजरीवाल फ़ौरन चुनौती को कबुलते हुए आनन् फानन में पार्टी बनाने की तय्यारी में जुट गए जिसका विरोध अन्ना हजारे ने भी किया और एक मजबूत टीम टूट के बिखर गयी कमजोर पड़ गयी और यही कांग्रेस की गहरी चाल थी जो केजरीवाल समझ न पाए अभी भी वक्त बाकि है बजाय अपने चुनाव लड़ने के जो लोग पहले से राजनीती कर रहे हैं और चुनाव लड़ते रहे हैं उनमे से इमानदार लोगों की पहचान कर उनके लिए वोट मांगे तो जयादा अच्छा होगा और फिर वे २०१४ में कुछ अपने लोगों को भी चुनाव लडवा सकते हैं और जनता से किसी तरह का वादा न करें क्यूंकि अगर वादा करके पूरा नहीं कर पाए तो जनता तो निराश होगी ही उनकी नयी नयी राजनितिक पार्टी भी ख़तम हो जाएगी अगर जनता को विकल्प देना चाहते हैं तो अभी जनता के बीच घूमें और संगठन बनाने पर जोर दें ज्यादा से ज्यादा लोगों को अपने साथ जोड़ें और वह भी देश के हर भाग में अपनी पैठ बनाने की कोशिस करें फ़िलहाल मेरी रे में यही उनके लिए जरुरी और सही कदम कहलायेगा

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भारत के लिए पर्स पीड़ित अवमूल्यन संचलन में डॉलर डाल, निर्यात और आयात पर अमेरिकी डॉलर के साथ बातचीत करने के लिए सिक्के के बढ़ाने के लिए भारत के सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि अगर भारत के सकल घरेलू उत्पाद में 10% बढ़ने के लिए प्रतिवर्ष देश होगा की तलाश की तलाश के लिए आवश्यक नहीं है भारत के शेयर पर सुपर मूल्यांकन के लिए प्रति वर्ष 10% ब्याज पकड़ और मुद्रास्फीति की दर प्रति वर्ष कम से कम 5% है जो surficiente हो रहा है, अगर आप चाहते हैं एक साफ कचरा राष्ट्र आय पर एक 2% कर चार्ज चाहिए हर महीने हो सकता है कचरा संग्रह है जो राष्ट्र के लिए सार्वजनिक खर्च करने के लिए सबसे अच्छी अर्थव्यवस्था के साथ देश में सुधार करने के लिए साफ नहीं है हम चाहिए संरक्षणवाद सीमा शुल्क 60% तक अमेरिका और चीन को भारत के लिए प्रभारी अर्थव्यवस्था में एक शक्तिशाली उद्योगों के विकास को भी है, भारत के लिए एक नहीं मूल्य न्यूनतम मजदूरी बनाने के लिए भारत के लिए एक हजार रुपए को पार करने के लिए एक शक्तिशाली सेना यूरोप एक सहयोगी भारत के लिए एक युद्ध हार कभी नहीं होगा की शाफ्ट में प्रवेश करने के लिए दुनिया की अर्थव्यवस्था की एक Imperia आ जाएगा करने के लिए आवश्यक है नि: शुल्क फार्म कि एक साम्राज्य और अर्थव्यवस्था बन गया है भारत - यूरोप, रूस, जापान, अर्जेंटीना, उरुग्वे के बीच व्यापार अर्जेंटीना और उरुग्वे की वजह से कभी नहीं भूखे और अन्य देशों के सीमा शुल्क के 20% के द्वारा नियंत्रित किया जाएगा, रक्षा करना चाहिए विरासत और राष्ट्रीय विरासत संघीय और नगरपालिका विरासत समाजवाद या साम्यवाद के द्वारा अभी तक जा सकता है कि अर्थव्यवस्था सुरक्षित हो सकता है, और पूंजी के लिए राज्य के निजीकरण के चाहिए नष्ट नहीं होगा, और न ही राजधानी में आयोजित किया जाएगा, ताकि राज्य को नष्ट किया जाना चाहिए वैसे भी.

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विनोभा भावे / भूमि आंदोलन के प्रमुख तथा भारत के बहुत बड़े समाज सेवी आचार्य विनोबा भावे महात्मा गांधी के समकाली थे. इन्होंने गुरु घर के किर्तनीएं भाई धर्म सिंह जख्मी मिलने गये तो वह बहुत खुश हुए और कहने लगे कि मुझे गुरु नानक देव जी की रचित आरती 'गगन मै थाल॒ रवि चंद दीपक बने तारिका मंडल जनक मोती' का शब्द सुनाओ. जब भाई साहब ने यह शब्द सुनाया तो वह आंनद मयी अवस्था में लीन हो गये. इस शब्द के बाद कहने लगे कि यह गुरु नानक देव जी की महान विशालता है कि जिन्होंने सारे ही गगन मंडल को एक थाल समझा है. चांद तारे तथा सूर्य को दीपक माना है और सारी वनस्पति की महक को परमेश्वर की आरती के लिए  अगरबत्ती समझा है. कियोंकि इस आरती में सारा संसार शामिल हो जाता है.इसलिए यह आरती एक धर्म विशेष की ना होकर , बल्कि सारी मानवता की है. उन्होंने गुरु नानक देव जी की वाणी का अनुवाद भी किया था.

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